Tuesday, 30 December 2025

गज़ल। 28

 





गज़ल   28



122       122     122    12
1.गुजरती हुई शाम भी देख अब
जो आया वो  पैगाम भी देख अब

2.पहाड़ों को काटा गया गर यूं ही
भुगतना ये  परिणाम भी देख अब

3.तुझे प्यार मैनें किया रीझ कर
पुकारा तेरा नाम भी देख अब

4.निभाया है रिश्ता तुझी से है ना
किए     सब्र का अंजाम भी देख अब
                    
5. सभी  अपनी कारों से चलते हैं नील
सड़क पर लगा जाम भी देख अब
           




Monday, 22 December 2025

गजल 27

 

   




     गजल  27


122    122    12 2     122


1किए दफ्न सारे ही अहसास मैनें
किया जो नया हास परिहास मैंने

2दिलों को गया छू ये अंदाज मेरा
निभाए  सभी वायदे खास मैनें

3बिलखते यूँ बच्चे मिले भूख से जब
किया  फिर यूँ दिनभर  ही  उपवास मैंने

4कहो कम करेंगे प्रदूषण हमीं सब
सिखाया सभी को बिठा पास मैंने

5.बढ़ी उलझनें जब भी जीवन में नीलम
किया किसलिए खुद को भी यास मैंने            

Saturday, 13 December 2025

26 गज़ल

 


  221     2     122     2      21 2122
1.अब तुझ से यूँ  बिछड़ने का क्यूँ मलाल आया
होकर जुदा भी मुझको तेरा खयाल आया

2. गर प्यार था निभाने में क्यों हुई यूँ मुश्किल
क्योंकर जेहन में फिर से  हरदम सवाल आया

3महफिल में तो नहीं था कोई वजूद तेरा
जब शून्य  में निहारा    तेरा जलाल आया

4.मुश्किल हुआ यूँ मिलना सरहद पे अब है पहरे
मिलते हैं  दिल से उत्तर भी बाकमल आया

सदियों से थी विरासत सॅंभली हुई हमारी
फैला हुआ प्रदूषण बनकर ये काल आया

6.कहते रहे खुदा का अवतार स्वयं को जो
उनका अहं भी टूटा जब इंतकाल आया

7.साहित्य से जो जुड़कर नीलम बने सयाने
जीना उन्हें भी जीवन तब बे मिसाल आया

       

Wednesday, 26 November 2025

25 गज़ल

 



212        212       1222

 
1.इससे बढ़कर न गम जमाने में
यार हो साथ जब हराने में

2.काटता जा रहा है पेड़ों को
वक़्त लगता जिसे उगाने में

जल गई निर्धनों की झोंपड़ियाँ
कुछ को आया मजा सताने में

मत दगा यार से करो यारों
इन से मिलती शफा निभाने में

खर्च करदी है  ऊर्जा अपनी यूँ
बेवजह नील को दबाने में
       

Friday, 21 November 2025

चटनी

       







चटनी

बहुत साल पीसी है मैंने 

चटनी सिलवटें पर

वह सिर्फ चटनी नहीं थी 

उसमें पिसे हुए थे

 मेरे कुछ जज्बात कुछ खुशी के लम्हे 

जो बीत ना पाए थे  साथ मेरे

धनिया  पुदीने  की पत्तियों के साथ 

पिसे हैं मैंने अपने ताजा  कोमल ख्वाब  इसी सिलबट्टे पर 

मुझ से पहले भी 

 कई बार पिस चुके हैं 

 उन औरतों के  सपने 

जिनके नरम पोटो ने छुआ है

मुझ से पहले  सिलबट्टे को 

 कई पीढ़ियों की औरतों को छला है

 मरहूम किया है अपने  सपनों से

 दूसरों की रोटी का स्वाद 

और भी स्वाद बनाने के लिए

 पर मैं नहीं चाहती मेरे बाद

कोई  छुए इस सिलबट्टे को

और पीस दे अपने अरमानों को

 चटनी के साथ साथ

 

Tuesday, 4 November 2025

ਆਪਣੀ ਖੁਸ਼ਿਆਂ

         








ਜਵਾਨ ਹੁੰਦੀ ਹਰ ਕੂੜੀ ਕੋਲ

ਹੁੰਦੇ ਨੇ ਦੋ ਰਾਹ

ਵਿਚਲਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

ਕੇੜੇ ਰਾਹ ਤੇ ਚੱਲੇ

ਇਕ ਰਾਹ  ਉਹ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

ਜੋ ਮਾਂ-ਪਿਉ ਦੀ  ਦਿਖਾਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ 

ਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਵੀ ਉਸਨੂੰ ਤੁਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ

ਸਦੀਆਂ ਤੋ ਚੱਲੀ ਆਈ ਊਸ ਰਾਹ ਤੇ

ਦੁਜੀ ਰਾਹ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

ਜਿਸਤੇ ਚੱਲ ਕੇ ਉਹ  ਲਭਣੀ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹੈ

ਆਪਣੀ  ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਅਪਣਾ ਸੁੁਕੁਨ

ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਕੁੜੀਆਂ ਤੁਰਦਿਆਂ ਨੇ

ਨਵੀਆਂ ਰਾਹਵਾਂ ਤੇ

ਪਰ ਜੋ ਵੀ ਤੁਰਦਿਆਂ ਨੇ 

ਬਨਾ ਲੈਦਿਆਂ ਨੇ ਆਪਣੇ ਲਈ ਥਾਂ

ਸਿਰਜ ਲੈਂਦੀਆ ਨੇ ਇਕ ਨਵਾਂ ਜਹਾਂ

ਇਤਿਹਾਸ ਯਾਦ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਊਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ

ਤੇ ਅਮਰ ਹੋ ਜਾਦਿਆਂ ਨੇ ਊਹ

ਹਮੇਸ਼ਾ ਹਮੇਸ਼ਾ ਦੇ ਲਈ


Tuesday, 21 October 2025

24 गज़ल

 




122         122       122      122


 ये  सखावत रहेगी यही तय हुआ था
बिछड़ना नही अब यही तय हुआ था

दिखे रंग कोई भी हम खुश रहें गे
लियाक़त रखेंगे यही तय हुआ था

.युवाओं   नशा छोड़ दो साथ  हम हैं
दिखाना है जज्बा  यही तय हुआ था

 फरिश्ता नहीं अब बनाना किसी को

मसीहा बनेंगे  यही तय हुआ था

न भटकेंगे अब राह हमसब  यूँ नीलम
नई राह खोजें यही तय हुआ था

Saturday, 11 October 2025

गज़ल 23

 



1222   1222    122      212  22
1.जिसे सपनों में मैंने था बसाया वो तुम्हीं तो हो
जिसे किस्मत ने मेरी आजमाया वो तुम्हीं तो हो

2.धरम  हथियार बन ठगता रहा सदियों से लोगों को
इसी नफरत से दुनिया को जलाया  वो तुम्हीं तो हो

3. नयामत जिंदगी बनती हमारी साथ चलने से
उम्र भर साथ चल जीना सिखाया वो तुम्हीं तो हो

4किया  वादा फलक से तोड़ लाऊंगा सितारे अब
मेरी हर राह को आसां         बनाया वो तुम्हीं तो हो

5 नफासत छू गई तेरी मुझे इस प्यार से नीलम
नजर से प्यार यूँ  दिल में जगाया वो तुम्हीं
तो हो
      

Tuesday, 7 October 2025

गज़ल 22

 



122    122     122   12

तेरी याद में बुत बनाउंगा मैं
उसी बुत से घर को सजाऊंगा मैं

उधारी बढ़ी है कमाई घटी
रखा कर्ज लेकिन चुकाऊंगा मैं

अभी तक  मैं बेघर  गली में रहा
किसी दिल में इक घर बसाऊंगा मैं

जिन्होंने अभी तक दिया है दग़ा
उन्हीं को गले से लगाऊंगा मैं

लिखा था कभी ख़त उसे प्यार से
जुदाई पे सबको पढ़ाऊंगा मैं

तेरी याद में बुत बनाउंगा मैं
उसी बुत से घर को सजाऊंगा मैं
         

Wednesday, 1 October 2025

तुम ही तो

 






.बसाया था जिसे सपनों में मैंने तुम ही तो थे ना
उठाए थे कभी नखरे  हमारे भी   तुम ही तो थे ना
2.नयामत जिंदगी बनती हमारी साथ चलने से
किया आसान मुश्किल राह को वो  तुम ही तो थे ना
3.धर्म हथियार बन ठगता रहा सदियों से लोगों को

हवा नफरत की फैलाने में माहिर तुम ही तो थे ना
4.शिकारी जाल फैला कर पकड़ता मीन समुद्र में
जहाजों में चढ़ा निर्यात वाले तुम ही तो थे ना

5दिवस हिन्दी मना तौहीन करते रोज़ इस की भी
बधाई अंग्रेजी में यूँ देते तुम ही तो थे ना


Monday, 29 September 2025

गज़ल 21

 

         


122    122    12 2   122


हवा चल रही फल  को बिखरा रहे हैं
गरीबों के बच्चों  को तरसा रहे हैं


दिया प्यार बेइंतहा जिन्दगी ने
उसी प्यार में खुद को बहका रहे हैं


परायी हूँ पर मान है दो घरों में
उसी मान से घर को महका रहे हैं


ठहर ही गए हैं  किसी रेत पर गम
जमीं पर नमी अब ये फिसला रहे हैं


कदम बढ़ चले तुझ से मिलने को नीलम
अना तेरी तुझको ही भटका रहे हैं


Saturday, 6 September 2025

हौसले

 






बहुत वेग से आता है पानी

 एक झटके में ही 

बहा कर ले जाता है सब कुछ 

पर कहां बहा कर ले जा पाता है 

इंसान के हौसले उसकी उम्मीदें 

जो कभी देखते हैं आसमान की ओर 

कभी देखते हैं  मदद के लिए

बढ़ रहे  मजबूत हाथों की  तरफ

जो भर देती है उनमें

 फिर से जीने का हौसला 

मजबूत कर देती है उनके कदम 

जैसे एक तीली माचिस से रगड़ खाकर  आग उत्पन्न करती है 

ऐसे ही एक कमजोर हाथ को 

जब मजबूत हाथ का सहारा मिलता है 

 तो वो मजबूत कदमों से 

पानी में से  

 सूखी जमीन पर कदम रखते हुए

हौसलों की उड़ान पर सवार हो

रब की मरजी को तरजीह दे

सपनों के बीज बोने लगता है 

फिर से नई उम्मीदों के साथ 

 

Tuesday, 2 September 2025

20 गज़ल

 



 ये दोस्ती रहेगी यही तय हुआ था
बिछड़ना नही अब यही तय हुआ था



दिखे रंग कोई भी हम खुश रहें गे
लियाक़त रखेंगे यही तय हुआ था

.युवाओं   नशा छोड़ दो साथ  हम हैं
दिखाना है जज्बा  यही तय हुआ था

फरिश्ता नहीं अब बनाना किसी को
मसीहा बनेंगे  यही तय हुआ था

भटकना  जरुरी है क्या राह से यूँ
नई राह खोजें यही तय हुआ था

Friday, 8 August 2025

ਰੱਖੜੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ

 ਰੱਖੜੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ 



ਭੈਣ ਭਰਾ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਦਾ ਪਿਆਰਾ

ਤਿਓਹਾਰ ਹੈ ਏ ਸਬਤੋ ਨਿਆਰਾ 

ਸਾਲ ਭੱਰ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਰਹਿੰਦਾ 

ਏ ਧਾਗਾ ਕਰ ਜਾਂਦਾ ਪਿਆਰ ਗਹਰਾ 

ਕਰ ਤਿਲਕ ਜਦ ਬੱਨਦੀ ਰੱਖੜੀ  ਭੈਣ 

ਹਾਥ ਸਿਰ ਤੇ ਰੱਖ ਭਰਾਂ ਬਣਦਾ ਸਹਾਰਾ

ਜਦੋਂ ਵੀ ਕਿਸੇ ਦੂਖ ਨੇ ਪਾਇਆ ਘੇਰਾ

ਉਸ ਵੇਲੇ ਮੈਂ  ਤੇਰੇ  ਨਾਮ ਦਾ ਲਾਇਆ ਬੂਲਾਰਾ 

ਬਚਪਨ ਤੋਂ ਜਵਾਨੀ ਤਕ ਦਿੱਤਾ ਸਾਥ

ਪਲਭਰ ਦਾ ਵਿਛੋੜਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਸੀ ਗਵਾਰਾ 

ਵਿਆਹ ਤੋ ਬਾਦ ਅੱਡ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਘੱਰ 

ਛੁਟਦਾ ਨਹੀ ਢੇਰ ਵੀ ਏ ਸਾਥ ਪਿਆਰਾ 

ਬੱਡਦੇ ਨੇ ਦੁਖ ਸੂਖ ਰਹਿੰਦੀ ਜਿੰਦਗੀ ਤਕ

ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਨੇ ਸਾਥ ਜਿੰਵੇ ਚੰਦ ਤੇ ਤਾਰਾ 

           

Wednesday, 9 July 2025

गज़ल 19

 


2122   2122   212 2   212



1.मोह के धागे पिरोना चाहती हूँ हार में
डूब जाऊँ टूट कर चाहूँ तुझे ही प्यार में

2.चाह कर होता नही विश्वास नेता पर कभी
लोग धोखा दे रहे हैं बैठ कर सरकार में

3.रह  न पाऊँगी अकेले तेरे बिन ऐ हमसफर
छोड़कर जाना नहीं मुझको कभी मझधार में

4.यूँ सताना छोड़ भी दो बेवजह हम को  सनम
जिंदगी की लौ न बुझ जाए इसी तकरार में

5कितना मुश्किल है बचाना दोस्त अपने आप को
हर जगह हैं भेड़िये इन्सान के किरदार में

6 शोख है अंदाज उनका राज ये नीलम समझ
झेलनी कोई मुसीबत ना पड़े बेकार में
             




Monday, 26 May 2025

गज़ल 18

 

    
2122     2 122          2122    212
1ख़ूबसूरत भूमि प्यारी ढाल बननी चाहिए
हर सुबह हो खास शबनम ताल बननी चाहिए                   

2.छोड़ नफरत कुछ नही हासिल नया होना तुझे
ढेर  दुश्मन की ये धीमी चाल बननी चाहिए
                            
3 छोड़ दे लालच बशर जीने दे सब को अब यहाँ
गम की   लंबी रात अब खुशहाल बननी चाहिए                
4.बीज बोएं प्यार का पर्यावरण को साफ रख
खूबसूरत धरा प्यारी ढाल बननी चाहिए
5 चल लगाएं पेड़ हरियाली यूँ चारों ओर हो
बारिशों से   झूमती हर  डाल बननी चाहिए

6 खूबियाँ नीलम मुबारक हो तुझे बचपन की सब
जिंदगी में  अब ये सुर लय  ताल बननी चाहिए
 

Saturday, 17 May 2025

गज़ल 17


 


212        2   12    12  22


1अब तपिश ने किया इशारा है
चढ़ रहा रोज फिर से पारा है

2.मौसमी बारिशों के आने से
देखने को मिला नजारा है

3. बांटने की करो न कोशिश अब
नाज यूँ हिन्द पर हमारा है

4 मत सहारा लो झूठ का देखो
सच के आगे ये झूठ हारा है

5.साथ दे जो मदद करे सबकी
बस रहे उस का ही सहारा है

6 दम नही जो मिटा दे हस्ती को
खुद को मिट मिट के ही सॅंवारा है

7 नील डरती नहीं चुनौती से

उसका संघर्ष ही तो नारा है

Monday, 5 May 2025

गज़ल 16


 

गज़ल 16

2122     2 122          2122    212


1.जात पर कोई नहीं तकरार होनी चाहिए
एक भारत एक ही  हुंकार होनी चाहिए

2. आग तो सबको बुझानी ही पड़ेगी एक दिन
जो बदल दे सोच वो सरकार होनी चाहिए

3.भावना तो देश भक्ति की सदा कायम रहे
     साजिशों के दौर से इनकार होनी चाहिए


4  जो जिहादी हैं हमारे देश में करते फसाद
     उनके सीने में तो गोली पार होनी चाहिए
 
5. हक बराबर का अगर देता है सबको संविधान
   फिर न कोई मजहबी दीवार होनी चाहिए

6.देश को जो तोड़ते उनमें रहे डर मौत का
  हो सजा ऎसी कि हाहाकार होनी चाहिए

7  फायदा कुछ भी नहीं है भोथरी तलवार से
  जो रखो तलवार उसमें धार होनी चाहिए


8. देश सब का है अमन कायम रखना सभी
बेवजह नीलम न कोई  खार होनी चाहिए




                   

Wednesday, 30 April 2025

गज़ल 15

 

गज़ल 15
122  122          122  12

1. खुदा तुझ से आती इनायत  रही
हमेशा से फिर भी  शिकायत रही

2.भटकते है इंसाफ को लोग अब
कहीं बिक हमारी  सियासत रही

3.लगे फैसला करने जो न्याय का
नही उन में कोई लियाक़त रही

4.बहाता रहा जो पसीना बशर
मिली उस को फिर भी हिकारत रही

5 दिखाता रहा राह सपनों की जो
उसी बाप से ही  खिलाफत रही

6 करे दान  संपत्ति  का 'नील' जो
उसी के ही हाथों नियामत रही

Tuesday, 22 April 2025

धरती और आसमां

 

   धरती और आसमां
आहें तो उन पक्षियों ने भी भरी होगी
जब हमने काट दिए पेड़
गिरा दिए  गए उनके घोंसले
वहाँ पर पड़े हुए उन पक्षियों के अंडे
अंडों को सेने की उम्मीद में
लौटे होंगे घोंसले की तरफ
गिरा घोंसला कटा पेड़ देख
उनके दिल पर क्या बीती होगी
फिर शायद समझौता कर लिया
उन  पक्षियों ने भी
बचाने को अपनी प्रजाति
बेशर्मी से घुस आए हमारे ही घर में
या शायद जुड़ा होगा नाता उनका
उस जमीन से भी कुछ
उस आसमान से भी
इसी खुश फैहमी  में शायद
चहकते फिरते हैं पंछी भी
जमीं ना सही आसमां तो अपना है
चल रही है कशमकश अभी भी
उनके मनरेगा में
और इंसान सोच रहा है
हथियाने को आसमां
    22.4.25

Sunday, 6 April 2025

12 गज़ल



 

12 . गज़ल


1222   1222  1  2     22  1222


1. मुहब्बत हो गई उनसे तो फिर तकरार क्या करना
झगड़ना इश्क में शिकवे गिले  बेकार क्या करना।


2.बगीचे में उगाये आपने फूलों को मेहनत से
तो उन फूलों का यूँ बाजार में व्यापार क्या करना


3 कभी  थी भीड़ का हिस्सा  अकेली हो गई अब तो
मगर हिम्मत नही हारी है बन लाचार क्या करना


4 सफेदी सी उतर आई है जो बालों में अब मेरे
शिकायत भी खुदा से ना रही अब यार क्या करना


5.है रोशन जिंदगी उस चांद से पहलू में बैठा जो
झरोखे से दिखे उस चांद का दीदार क्या करना


6.दिवाली ईद दोनों को मनाएं प्यार से मिलकर
करें नीलम दुआएँ  यूँ वतन   बेजार क्या करना

Saturday, 29 March 2025

14 गज़ल

 

14 गज़ल
2212     2      212         2212   

 
1.यादों में वीरों को बसाया जाए अब
इति हास बच्चों को बताया जाए अब


2. माटी गए मिल जो बचाने देश को
  सिर ताज उनके भी  सजाया जाए अब


3 नारा भगत का भर दे  सब में जोश ये
ऐसा चलन  कोई  चलाया जाए अब


4 विस्मृत हुये वे सब लड़े दुश्मन से जो
कुछ नाम उन का दोहराया जाए अब


5.फांसी का फंदा चूम जो कुर्बां हुए
टीका शहादत का लगाया जाए अब


6.हर दम ही वंदे मातरम का गीत ये
मस्ती में माँ की गुनगुनाया जाए अब



7.भारत नही कमजोर हस्ती मिट सके
जज्बा युवाओं में जगाया जाए अब

Wednesday, 19 March 2025

गज़ल 11

 

       गज़ल 11
2122  212  2 2122


1.वो जता पाया नहींं उसने कहा क्या
मैं कभी समझा नही  उसने कहा क्या

2.सब बताने की जरूरत क्या थी लब से
तल्खियाँ कह ही गई उसने कहा क्या

3.कह गई नजरें बताने को रहा क्या
वो छुपाता फिर कैसे उसने कहा क्या

4.क्यूँ करी नाराजगी जाहिर तुझी से
सोहबत से खुश नहीं उसने कहा क्या

5.याद आती हैं तेरी कहानियाँ भी
छोड़ आई पास मेरे उसने कहा क्या

6.हो जुदा तुमसे मुझे भी कहना है कुछ
चाहती है वो मुझे उसने कहा क्या

7. फूल कैक्टस का मुझे प्यारा लगे है
प्यार उसको था कभी उसने कहा क्या
   



Thursday, 13 March 2025

13 गज़ल

 

2122   121


  2  22
   
       13. गज़ल
आ लगा जा गुलाल होली में
कर दे रंगीन गाल  होली में

संग तेरे कभी ना रह पाई
बस यही है मलाल होली में 

मुश्किलों छोड़ दो दमन करना
  मरना    जीना मुहाल होली में

बन रही टोलियाँ युवाओं की
आ गया है उबाल होली में

प्यार के रंग में उसने रंग के मुझे
कर दिया है निहाल होली में
        
  

Friday, 7 March 2025

डर

 



         डर
कई बार मैं डर जाती हूं
जब बेटी को देखती हूं
खिलखिला कर हंसते हुए
कहकहे लगाते हुए
उसको स्पष्टता से बेबाकी से
अपनी बात कहते हुए
देर रात दोस्तों के साथ घूमते हुए
ठीक को ठीक गलत को गलत कहते हुए अपनी ठीक बात  पर कायम रहते हुए फिर सोचती हूं
मैं भी तो यही कुछ करना चाहती थी अपनी जवानी में
लेकिन मुझे डरा दिया गया
समाज के नाम से
रीति रिवाज के बंधनों से
मां-बाप की इज्जत के नाम पर
और मैं डर गई
समेट लिया मैंने अपने आप को
अब मैंने सोचा
बेटी को नहीं डराऊंगी
वह जो करना चाहेगी
मैं उसके साथ ही खड़ी नजर आऊंगी

Tuesday, 25 February 2025

10. गज़ल



 10. गज़ल


122  122    122    122    

                      


1.रुलाने से अच्छा खफा  छोड़ जाते
तसल्ली तो होती वफा छोड़ जाते


2. तुझे देखती दूर तक अलविदा कह
मुड़े जो गली से हया छोड़ जाते


3. हमेशा मुझी से शिकायत की तुमने
    जुदाई से पहले खुशी छोड़ जाते


4.ये दीपावली रोशनी का है उत्सव
खुशी के लिए एक दिया छोड़ जाते


5.पुराने जमाने से अच्छा समा है
कहानी में फिर कुछ नया छोड़ जाते


6. किया इश्क़ चाहा दिलोजान से यूँ
निभाते नहीं तो जहाँ छोड़ जाते

Sunday, 16 February 2025

9 गज़ल

           गज़ल


माना मिले थे हम कभी अनजान की तरह
तुमको करुं यूं याद मैं भगवान की तरह


लिखना तो चाहते हैं गरीबों पे लोग सब
माना नही विचारते इंसान की तरह


ना चाहते हुए भी    भरोसा रहा मेरा
जैसे मिली उसे फिर वरदान की तरह


आंसू बता रहे हैं कहानी ये रात की
बीती है जिन्दगी तेरी अहसान की तरह


मंशा नही थी  दुख यूं जताने की मेरी भी
चाहा है उस को मैंने  दिलोजान की तरह


वादे पे जिसके मैंने भरोसा किया है अब
धोखा मिला उसी से है शैतान की तरह

Tuesday, 11 February 2025

8 गज़ल


 122     122     122    122

 किसी से  की कोई जलालत नहीं है 

खुदा से बड़ी  ये अदालत नही है


रखा कोई रिश्ता नहीं उन से जिनको

रही बोलने की लियाकत नहीं है 


परिंदा हूँ  कमज़ोर पर हैं  ये मेरे

  अभी उड़ने  की मुझमें ताकत नहीं है


समय की नजाकत को समझो जरा सी

मुकरने की वादे से आदत नही है


 गयी  लौट चेहरे मेरे की वो रौनक

 रही मुझमें अब वो नजाकत नहीं है


 शिकायत रखी ही ना  गैरों से नीलम

दी अपनों ने भी कोई  राहत  नही है

Wednesday, 5 February 2025

7. गज़ल

 


1222     1222          1222   1222

जियेंगे साथ हम दोनों अभी तो जज्बात  बाकी है।
करें हम मन की  बातें कुछ अभी तो रात बाकी है ।।
 दिए जो वक़्त ने जख्म उनसे झुक  गया हूँ 
मिली है जिंदगी से शह अभी ये मात बाकी है।।

 
 दिखाएं हैं तुझे दिलकश नजारे  जो मुहब्बत में।
इतर उनसे  सहन करना अभी ये घात बाकी है।।
लुटाना  चाहता था इश्क़ में सब कुछ तुम्हें अपना। 

मैं डरता हूँ बतानी जो अभी ये जात बाकी है।।

 
खड़े हैं संत दरवाजे पे रख उम्मीद खाने की।
खिलाऊं किस तरह उनको  बनाना जो अभी ये भात बाकी है।।

 
नवाजिश रुख है दरकार पानी की उसे नीलम
बचा ले सूखने से उसे  अभी तो पात बाकी है


Thursday, 30 January 2025

6 गज़ल

 

          6 गज़ल
122        122         122      122 
खलल तो डला पर  निकलते रहे हल
    वफा करने वाले  बदलते रहे दल

दुखों का रहा घेरा मेरे ही घर पर
     तेरे साथ जीकर गुजरते रहे पल

शज़र काट डाले क्यों फलदार हमने
जुदा हो शज़र से बिखरते रहे फल

ढका बादलों ने ही सूरज को ऐसे
बड़ी धुंध थी सब ठिठुरते रहे कल
 
यूँ मातम दुखों का न कर अब तू नीलम
तू कर इश्क़ रब से   महकते रहें पल
                         
                            

Tuesday, 21 January 2025

5. गज़ल

 

5. गज़ल
122  122    122 1 2
दिया दिल को धोखे का उपहार है
किया जो कपट  उस की ये हार है

बिगड़ने लगे बच्चे अब आजकल
नशा करता  बरबाद परिवार है

हमेशा जहाँ का नियम ये रहा
मिलन ओर जुदाई की दरकार है

वो रिश्ता हुआ  जी का  जंजाल ही
  बना दोगला जिस का किरदार है

ए नीलम चुनौती दे इस रीत को
बदल जाता लड़की का हकदार है





Monday, 20 January 2025

ਧੁੰਦਲੇ ਵਰਕੇ

 

     ਧੁੰਦਲੇ  ਵਰਕੇ 
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਪਾੜ ਦਿੱਤੇ ਨੇ
ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀ ਕਿਤਾਬ ਚੋਂ
ਜੋ ਕਰ ਰਹੇ ਸੀ ਮੈਨੂੰ ਪਰੇਸ਼ਾਨ
ਤੇ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦੀ ਰਾਹ ਚ
ਬਣ ਰਹੇ ਸੀ ਰੋੜਾ
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਪੈ ਗਏ ਸੀ ਪੀਲੇ
ਸਾਰ ਨਹੀਂ ਰਹਿ ਗਿਆ ਸੀ ਕੋਈ
ਨਾ ਹੀ ਕੋਈ ਅਹਿਮੀਅਤ ਰਹਿ ਗਈ ਸੀ
ਇਸ ਵਾਸਤੇ ਪਾੜ ਕੇ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤੇ
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਗਿੱਲੇ ਹੋ ਗਏ ਸੀ
ਵਕਤ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਹੰਝੂਆਂ ਨਾਲ
ਉਹ ਵੀ ਮੈਂ ਪਾੜ ਦਿੱਤੇ
ਭੁੱਲੇ वक़्त ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਵਾ ਕੇ
ਝਾਕਦੇ ਸੀ ਹਰ ਵੇਲੇ ਕੋੜਾ ਕੋੜਾ
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਜੋ ਭਿੱਜੇ ਹੋਏ ਸੀ  ਚਾਸ਼ਨੀ ਦੇ
ਜਵਾਨੀ ਇਸ਼ਕ  ਤੇ ਬਚਪਨ ਦੀ ਨਾਦਾਨੀ ਦੇ
ਸੋਹਣੇ ਵਕਤ  ਨੂੰ ਕਰਵਾਉਂਦੇ ਸੀ ਯਾਦ
ਉਹ ਰੱਖ ਲਏ ਆਪ ਨੂੰ  ਖੁਸ਼ ਰੱਖਣ ਲਈ
ਹੱਸਦੇ ਸੀ ਮੈਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਥੋੜਾ ਥੋੜਾ
ਹੁਣ ਨਵੀਂ ਕਿਤਾਬ ਬਣਾਣੀ ਹੈ
ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਸੋਹਣੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਨਾਲ
ਸਜੀ ਹੋਈ ਅਰਮਾਨਾ ਤੇ  ਖਵਾਈਸ਼ਾਂ ਨਾਲ
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਖੁਸ਼ਨੁਮਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਆਸ ਤੇ
ਹਸਾਊਗੀ ਮੈਨੂੰ ਭੋਰਾ ਭੋਰਾ
ਏਸ ਲਈ ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਪਾੜ ਦਿੱਤੇ ਨੇ
ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀ ਕਿਤਾਬ ਚੋਂ
    

Friday, 17 January 2025

4गज़ल

           गज़ल

गरीबी में पलकर बड़ा जो बनेगा
निसंदेह इंसाफ सबसे करेगा


निगाहें किसी की सदा दे रही है
जरा सोच तो  साथ कब तक चलेगा


गुजर तो रहे हैं गली से   यूँ उनकी   

 पता चलने पर क्या जमाना कहेगा


चले गाँव की ओर फिर घर संभाले
शहर में नही कोई किस्से सुनेगा


हमेशा  रखो उस खुदा पर भरोसा
परेशानियों से कहो दिन ढलेगा


Tuesday, 14 January 2025

3.गज़ल

 


फिजाओं में घूमा  नया इक फसाना
बना प्यार का फिर नया क तराना

यही सोचकर गम छिपाने लगा हूँ
क्यूँ ऐसे किसी ओर का दिल दुखाना

हराया अंधेरों को अपनी ही जिद से
न परवाह की क्या कहेगा जमाना

अदाओं से माना चलाती है जादू
है मुश्किल यूँ धोखे से मुझ को हराना

जिए जा रही हूँ मैं अपने लिए ही
मिली जिंदगी को है बस आजमाना
 

Sunday, 12 January 2025

2.गज़ल

 

           


मुहब्बत का  कैसा  चढ़ा ये नशा है
   कदम मेरा तेरी तरफ ही बढ़ा है


   तेरी रूह को छू रही है नफासत
हरफ दर हरफ  मैंने तुझको पढ़ा है


मिला साथ तेरा मुझे जिन्दगी में
तुझे देख दिल ये धड़कने.लगा है


इसी प्यार को याद करती रहोगी
हमारी कहानी सभी से जुदा है


चमकता रहा है सितारा हमेशा
बुलंदी  से नाता पुराना रहा है


विरासत  उलझती रही है हमारी
  बदलता हमेशा जमाना चला है


निखरने लगी हूँ  तुझे देख कर मैं
ऐ नीलम   हुई जिंदगी  एक नशा है

Tuesday, 7 January 2025

1.इबादत

 212       2,   2122,  2     122, 212 

1जब मेरी चाहत  इबादत थी कजा कैसे हुई

खास थे कुछ लोग उनसे बेवफा कैसे हुई


2प्यार का तुहफा मिला था जो मुझे है याद वो

जिंदगी तुझसे मुहब्बत थी सजा कैसे हुई



जाने क्यों धोखा किया है दोस्ती के नाम पर

पारखी तेरी नजर मुझ से जुदा कैसे हुई


दीपकों ने साथ जलकर भी भगाया तीरगी

आँधियों में रोशनी घर से हवा कैसे हुई



भीड़ की खामोश नजरों ने दुआएं ही न कीं

जख्म ज्यों के त्यों रहे तो फिर दवा कैसे हुई

 

 जिन्दगी ने हर समय धोखे दिये नीलम तुझे

छोड़कर नफरत तेरी रोशन शमा कैसे हुई

Thursday, 2 January 2025

नया साल

 

          नया साल
हर साल की तरह फिर  नया साल आया
बैठे-बैठे कुछ नया करने का ख्याल आया

खुशकिस्मत समझूँगा मैं अपने आप को
गर  एक भी चेहरे पर मुस्कान ला पाया

लेता रहा हूं बहुत कुछ समाज से हरदम
ढलती उम्र में  समाज को देने का वक्त आया

छोड़ दो अतीत की, बीते साल की बातें
इस्तकबाल करो ये जो नया सवेरा लाया

जूझ रहे हैं जो गम दुख एकाकीपन से
बन  उनकी हिम्मत बनना है उनका हमसाया

साथ खड़े होना सीख दुख में हर किसी के
पराया नहीं जैसे हो वह तेरा ही  मां जाया

समझूंगा खुद का जीवन बेकार ही गया
गर नफरत जात-पात के बंधन ना तोड़ पाया

साहित्य  से लोगों में देशप्रेम का जज्बा जगाया
नीलम ने साहित्यकार होने का फर्ज निभाया
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