Tuesday, 30 December 2025

गज़ल। 28

 





गज़ल   28



122       122     122    12
1.गुजरती हुई शाम भी देख अब
जो आया वो  पैगाम भी देख अब

2.पहाड़ों को काटा गया गर यूं ही
भुगतना ये  परिणाम भी देख अब

3.तुझे प्यार मैनें किया रीझ कर
पुकारा तेरा नाम भी देख अब

4.निभाया है रिश्ता तुझी से है ना
किए     सब्र का अंजाम भी देख अब
                    
5. सभी  अपनी कारों से चलते हैं नील
सड़क पर लगा जाम भी देख अब
           




Monday, 22 December 2025

गजल 27

 

   




     गजल  27


122    122    12 2     122


1किए दफ्न सारे ही अहसास मैनें
किया जो नया हास परिहास मैंने

2दिलों को गया छू ये अंदाज मेरा
निभाए  सभी वायदे खास मैनें

3बिलखते यूँ बच्चे मिले भूख से जब
किया  फिर यूँ दिनभर  ही  उपवास मैंने

4कहो कम करेंगे प्रदूषण हमीं सब
सिखाया सभी को बिठा पास मैंने

5.बढ़ी उलझनें जब भी जीवन में नीलम
किया किसलिए खुद को भी यास मैंने            

Saturday, 13 December 2025

26 गज़ल

 


  221     2     122     2      21 2122
1.अब तुझ से यूँ  बिछड़ने का क्यूँ मलाल आया
होकर जुदा भी मुझको तेरा खयाल आया

2. गर प्यार था निभाने में क्यों हुई यूँ मुश्किल
क्योंकर जेहन में फिर से  हरदम सवाल आया

3महफिल में तो नहीं था कोई वजूद तेरा
जब शून्य  में निहारा    तेरा जलाल आया

4.मुश्किल हुआ यूँ मिलना सरहद पे अब है पहरे
मिलते हैं  दिल से उत्तर भी बाकमल आया

सदियों से थी विरासत सॅंभली हुई हमारी
फैला हुआ प्रदूषण बनकर ये काल आया

6.कहते रहे खुदा का अवतार स्वयं को जो
उनका अहं भी टूटा जब इंतकाल आया

7.साहित्य से जो जुड़कर नीलम बने सयाने
जीना उन्हें भी जीवन तब बे मिसाल आया