अमलतास
जेठ की तपती दुपहरी में
सड़क के किनारे चलते हुए
देख कर अमलतास के फूलों को
गर्मी से कुम्लाहे चेहरे पर भी
आ जाती है हल्की सी मुस्कान
खिल उठता है मन भी
तेरे सुनहरी फूलों की तरह
मन की मुस्कान के साथ-साथ
उतर जाती है तन की थकावट भी
खड़े रहो ऐसे ही इस्तकबाल करते हुए