Monday, 27 May 2024

अमलतास

        अमलतास

जेठ की तपती दुपहरी में

 सड़क के किनारे चलते हुए 

देख कर अमलतास के फूलों को

 गर्मी से कुम्लाहे चेहरे पर भी 

आ जाती है हल्की सी मुस्कान 

खिल उठता है मन भी 

तेरे सुनहरी फूलों की तरह

मन की मुस्कान के साथ-साथ 

उतर जाती है तन की थकावट भी

खड़े रहो ऐसे ही इस्तकबाल करते  हुए

Tuesday, 21 May 2024

ਚਾਹ

 ਕਲਿਆਂ ਬੈਠਕੇ ਚਾਹ ਪੀਤੀ ਤਾਂ ਕੀ ਪੀਤੀ

ਆਵਦੇ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕੀਤੀ ਤਾਂ ਕੀ ਕੀਤੀ 

ਚਾਹ ਪੀਣ ਦਾ ਸਵਾਦ ਤਾਂ ਹੈ ਦੋਸਤਾਂ ਨਾਲ 

ਕੁਝ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਸੁਨੀ ਤੇ ਆਵਦੀ ਕੀਤੀ 


 


Wednesday, 8 May 2024

पत्थर की पीड़ा

 

साहिल के किनारे बैठ
हवा संग आती जाती
लहरों को ताकना
नहीं है मकसद मेरा
मैं पीड़ा जानना चाहती हूं
उन पत्थरों की भी जो  टूटते रहते हैं
छोटे-छोटे टुकड़ों में
बनते रहते हैं हिस्सा
अविरल बहते समुद्र का
अपनी पहचान गवा कर