1212 1122 12 12 22
1.नशे को बेच वो दौलत कमा चला आया
किसी के घर का यूँ दीपक बुझा चला आया
2.जुटी हैं जेब को यूँ भरने कहीं ये सरकारें
बहन को बेच वो रोटी कमा चला आया
3.तलाशते थे जो रोटी शहर में कचरे से
उन्हीं से मुँह तू क्यूँ फेर कर चला आया
4.जहर दिया था जिसे बाप ने नशा करके
वो खून माँ के ही सपनों का कर चला आया
5.छिड़क दिया है जो खाने में अब जहर नीलम
उसे खरीद के बच्चों को दे चला आया
