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तेरी याद में बुत बनाउंगा मैं
उसी बुत से घर को सजाऊंगा मैं
उधारी बढ़ी है कमाई घटी
रखा कर्ज लेकिन चुकाऊंगा मैं
अभी तक मैं बेघर गली में रहा
किसी दिल में इक घर बसाऊंगा मैं
जिन्होंने अभी तक दिया है दग़ा
उन्हीं को गले से लगाऊंगा मैं
लिखा था कभी ख़त उसे प्यार से
जुदाई पे सबको पढ़ाऊंगा मैं
तेरी याद में बुत बनाउंगा मैं
उसी बुत से घर को सजाऊंगा मैं

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