Monday, 24 April 2023

थोड़ी सी खुशी

 


         थोड़ी सी खुशी
कभी कभी निकल जाया करो यारों 
भीड़भाड़ से अलग सुनसान सी राहों पर खोजने खुद के लिए थोड़ी सी खुशी
तन्हाई  यादों संग बीता लिया करो
यारों के साथ बिताए हसीन पल
याद करके थोड़ा मुस्कुरा लिया करो
याद करना चाय की वो टपरी
  यारों संग बिताई वो हसीन शामें
याद करना वह पल पैसे के अभाव में
जब यारों के साथ सांझा की थी चाय
सच मानो वो काम करेगी टॉनिक का
बचपन की हसीन यादें और बेफिक्री
बेवजह मुस्कुराहट ला देंगी चेहरे पर
तब के बिताए सुकून भरे पल
आज के दर्द भरी जिंदगी में बहुत राहत देंगे
इसलिए यारों रह लिया करो कभी कभी
यूँ ही बेवजह यारों, यादों संग तन्हाई में
             

Thursday, 13 April 2023

ਆਈ ਵਿਸਾਖੀ

 ਵੇ ਜੱਟਾ ਆਈ ਵਿਸਾਖੀ 

ਮੂੱਕ ਗਈ ਕਣਕਾ ਦੀ ਰਾਖੀ

ਵੇ ਜੱਟਾ ਆਈ ਵਿਸਾਖੀ


ਚਲ ਚੱਲਿਏ ਹੂਣ ਮੇਲੇ ਨੂੰ

ਖੇਲਿਏ ਮਸਤੀ ਦੇ ਖੇਲੇ ਨੂੰ

ਤਕਿਏ ਸਜਦੇ ਹੋਏ ਠੇਲੇ ਨੂੰ 

ਧਕਿਏ ਅੱਗੇ ਏਸ ਰੇਲੇ ਨੂੰ

         ਆ ਬਨਿਏ ਏਸ ਮੇਲੇ ਦੇ ਸਾਖੀ 

        ਮੂੱਕ ਗਈ ਕਣਕਾ ਦੀ ਰਾਖੀ

          ਵੇ ਜੱਟਾ ਆਈ ਵਿਸਾਖੀ

ਆ ਸੁਨਿਏ ਗੱਲ ਜੋਗੀ ਤੇ ਚੇਲੇ ਦੀ 

ਆ ਦੇਖਿਏ ਲੜਾਈ ਸਾਪ ਨੇਵਲੇ ਦੀ

ਆ ਬਨਿਏ ਆਪਾ ਰੋਣਕ ਮੇਲੇ ਦੀ 

ਆ ਲਇਏ ਚੀਜ ਖਰੀਦ ਧੇਲੇ ਦੀ 

     ਆ ਬਨਿਏ ਏਸ ਮੇਲੇ ਦੇ ਸਾਖੀ       

     ਮੂੱਕ ਗਈ ਕਣਕਾ ਦੀ ਰਾਖੀ

     ਵੇ ਜੱਟਾ ਆਈ ਵਿਸਾਖੀ

Monday, 10 April 2023

असली भगवान

          असली भगवान

ये बड़े बुजुर्ग हमारे घर की शान है

इनसे समाज में बढ़ता सबका मान है 


देते हैं  सबको दुआएँ पोपले से मुंह से 

तब  ही तो घर में बिखरती मुस्कान है 


बस इनसे है संभली घर की धरोहर 

इनसे है विरासत ये अमूल्य खान है


आने वाली पीढ़ी को देते संस्कार है

बच्चों के भविष्य में इनका योगदान है


सुनाते है अपने अनुभव की कहानियाँ

  सब बच्चों में बसती उनकी जान है


दुख देते हैं बड़ों को जो ढलती उम्र में

खुद के सुख को ठोकर मारते नादान है


उनकी खुशियों का रखना हमें ख्याल है

उनकी मुस्कान से बनती खुद की पहचान है


क्या करोगे मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे जाकर

इनको खुश रखो ये असली भगवान है

              

Friday, 7 April 2023

संस्कार

 संस्कार

बहा कर पसीना ऊंचा तेरा मुकाम कर दिया

उम्र भर की कमाई को तेरे नाम कर दिया 


जब भी देखा तुझे किसी मुश्किल में फसे हुए

किसी की परवाह  बिना सब काम कर दिया 


जब भी उठी किसी की बुरी निगाह तेरी तरफ

उसकी हर  सोच हसरत को नाकाम कर दिया


बहुत गर्व था अपने दिए संस्कारों पर मुझे

 बड़ा ओहदा मिलते ही मुझे गुमनाम कर दिया


मैं रहा तेरे लिए घणी छांव सा पेड़ हरदम

तुने मेरी सारी  हसरतों का कत्लेआम कर दिया


न्योछावर कर दी सारी जवानी तुझे बनाने में

 साथ छोड़ बुढ़ापे में मेरा जीना हराम कर दिया