Friday, 30 January 2026

गज़ल 30

 





221,     2122,        221,        2122
1.ये सच है मेरी कर्मों का ही सबाब हो तुम
मेरे लिए ये मीठी धुन सी रबाब हो तुम

2.यूं तीरगी में खुद को, अक्सर  उदास पाकर
कहती थी जिंदगी को कब से अजाब हो तुम

3.आँखों ने प्यार सारा जाहिर ही कर दिया जब
फिर लब से चाहते क्यों सुनना जवाब हो तुम

4.फैला दी है जो हिंसा नफ़रत समाज में अब
कहते हो फिर ज़माने को ही खराब  हो तुम

5.बाहर कदम ना रखने देगा समाज नीलम
खुलकर  खुली हवा में  जीना भी खाब हो तुम
         

Tuesday, 13 January 2026

गज़ल 29

 


        गज़ल 29
1222        1222       1222 

  1.जी भर कर प्यार करना ना कसर रखना
यूं अपनी बात पर उसका असर रखना

2.बताना बात सच्ची झूठ मत कहना
ना कड़वी बात का कोई ज़हर रखना

3.जगह छोटी हो  चाहे घर बड़ा दिल रख 

बसा कर दिल में सारा ही शहर रखना

4.कभी जो भाव कागज पर लिखो मन के
गज़ल लिखना सही उसमें बहर रखना

5.कमाई कम सही पर सब्र ज्यादा हो
दुआओं में यूं ही सबकी खबर रखना

6.बसाया है जिसे अरमान से मन में
दुआ उसके लिए शामो सहर रखना

7.सभी बातें बतानी की नहीं होती
छुपा दुनिया से नीलम ये  जफर रखना