Monday, 23 December 2024

Oh nature

 

Oh nature
You wonderful nature
You create beautiful world
Tiny tots n beautiful creature
Some are small some are big
All are of different gesture
Some wear colorful feathers
Just as wearing beautiful vesture
Some big animals behave like men
They give their children investiture
All are mingle n live together
Just as a medicine digesture
Nature oh you wonderful nature

Thursday, 12 December 2024

Oh jasmine oh jasmine

    Oh jasmine oh jasmine


Oh What a dwell
Oh your sweet smell
Fill me with joy
As I find a Jewell
Your white color
Soothing n well
I look at you
Bound with a spell
my favorite flower
Keep you under shell
How much I love you
I  could't  express n tell

Oh jasmine oh jasmine

Saturday, 23 November 2024

बड़ी बात हो गई

 आदमी के लिए आदमी होना बड़ी बात हो गई

इंसानियत से जाने कब बड़ी जात पात हो गई


हैरान हो गया अपने सामने देखकर उनको

 भूला दिया था जिसे उससे मुलाकात हो गई


चल रहे थे अपने ही धुन में पगडंडियों पर 

 बदन दर्द के दर्द ने बताया कि रात हो गई


पड़े थे सूने चौराहे गलियां भी थी सुनसान 

 पता चला शहर में कोई बड़ी वारदात हो गई


वादा करके नौकरी देना भूल गई सरकार

पढ़े लिखे बेरोजगारों की खड़ी जमात हो गई

Saturday, 26 October 2024

एक तरफा इश्क़

 खारी फितरत

एक तरफा इश्क की

 बानगी तो देखिए 

छोड़ देती हैं नदिया 

अपनी शोखी अपनी चंचलता

 आतुर हो उठती है मिलने को 

उस प्रियतम से 

जिससे ना मिली है कभी

ना जानती हैं जिसकी खारी फितरत को

हिस्सा बन जाती हैं उस विशाल समुद्र का

छोड़ अपना वजूद अपना अस्तित्व 

         

Sunday, 13 October 2024

बासमती चावल

    बासमती चावल

बासमती चावल के खेतों के बीच

बनी सड़क पर से गुजरते हुए

जो महक उठती है

वो रच बस जाती है दिमाग में

मन करता है घंटों बैठे रहे वहीं

पर मंजिल पर पहुँचने की जल्दी

वंचित कर देती है उस सुख से

बढ़ जाते हैं आगे सफर पर

वक़्त की कमी को कोसते हुए

जहन से निकाल कर खुश्बू



Tuesday, 1 October 2024

फितरत

 खारी फितरत

एक तरफा इश्क की

 बानगी तो देखिए 

छोड़ देती हैं नदिया 

अपनी शोखी अपनी चंचलता

 आतुर हो उठती है मिलने को 

उस प्रियतम से 

जिससे ना मिली है 

ना जानती हैं जिसकी खारी फितरत को

हिस्सा बन जाती हैं उस विशाल समुद्र का

छोड़ अपना वजूद अपना अस्तित्व 






Saturday, 7 September 2024

साहिल से

 साहिल से

टकरा कर समुद्र साहिल से

मन में उठती तंरगों को 

शांत कर लेता है

झरने से गिरता पानी

टकरा कर पथरीली चट्टानों से

शांति से बह निकलता है

कल कल बहती नदियाँ

टकरा कर अपने ही शिलाखंड से

संगीत को जन्म देती है

प्रकृति कितने सुन्दर सुर छेड़ती है













Thursday, 29 August 2024

झीगूंर

 

झीगूंर
रात के सन्नाटे को चीरती
झींगूरों की आवाज
अंधेरे में रोशनी  बिखेरते
टिमटिमाते घुमते  जुगनू
ऐसा  प्रतीत होता है
मानो रास्ता दिखा रहे हो
अकेले चलने वाले राहगीर को
यह एहसास करवा रहे हो 
कि तुम अकेले नहीं हो इस राह में
हम भी तुम्हारे साथ है

Sunday, 25 August 2024

जन्माष्टमी

 जहां जन्माष्टमी आने पर 

मुसलमान सीते थे  

राधा कृष्ण की चोलियां

 ईद आने पर जिस शहर में 

हिंदू जुलाहे बनाते थे टोपियां

एक नेता भाषण क्या देकर गया

उस शहर की हर गली में

बन गई अलग अलग धार्मिक टोलियाँ

फिर नेताओं ने खेला एक खेल

पैसों से लगाई समर्थकों की बोलियाँ

मानवता हुई तार तार सड़कों पर

गली गली बिखरी टोपियां ओ चोलियां

Monday, 19 August 2024

ਕੜਤਣ

 


ਪੀ ਲੈਂਦੀ  ਮੈਂ ਸਾਰੀ ਕੜਤਣ ਜੇ ਪੀ ਸਕਦੀ 

ਊਨ੍ਹਾਂ ਦੋਸਤਾਂ ਦੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਸੀ ਬੰਦਗੀ 

ਖੁਸ਼ਨੁਮਾ ਮਹਫਿਲ ਸਜਦੀ ਸੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ

ਲਗਦਾ ਹੈ ਬਸ ਉਹੀ ਸੀ ਸੋਹਣੀ ਜਿੰਦਗੀ







Thursday, 8 August 2024

भीड़

             भीड़

भीड़ का कोई मजहब नही होता

कोई जात कोई रंग नही होता

ये होती है जरखरीद गुलामों की

अपने आप से कुठिंत मासुमों की 

भूल जाती है इंसानियत

खो जाता है व्यक्ति का वजूद अपना

समझ ही नही पाती 

कब भेंट चढ़ जाती है सियासतदानों की 

सब होते तो एक ही बिरादरी के हैं

कदर नही करते अपने इंसानों की 







Friday, 2 August 2024

सावन

      सावन

ईब का सावन कुछ न्यूं बरसया

ज्यों नैनन मै ते बरसे नीर

समझ गया यो बादल मैनें

मेरे मन मै समाई  सै घणी पीर 

कदे बरसया झमाझम

जद उठी घणी कसूती टीस 

कदै ढलकया बूंद पै बूंद

जद मिली आस की सीख

इसा सावन मत न दिखाईयों किसी न

जो डरके फेर किसे ताईं ना पावै प्रीत


Monday, 29 July 2024

दर्द

 

दर्द ने  जख्मों से कहा

दे कोई लफ्ज़ ऐसा
बयां कर सके जो हालत  मेरी
जख्म ने हंसकर कहा
दर्द का हद से गुजर जाना ही 

दवा है तेरी







Wednesday, 24 July 2024

ਮੈਨੂੰ ਪਿਆਰ ਮਿਲਿਆ

 

ਮੈਨੂੰ ਪਿਆਰ ਮਿਲਿਆ ਸਭ ਤੋਂ ਥੋੜੵਾ ਥੋੜੵਾ
ਚਲਦੇ ਹੋਏ ਕੰਡਾ ਵੱਜਿਆ ਕਿਤੇ ਰੋੜਾ ਰੋੜਾ

ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਬਹੁਤ ਜੇ ਪਲ  ਮਿੱਠੇ ਲਗੇ
ਕਈ ਪਲਾਂ ਦਾ ਸਵਾਦ  ਰਹਿਆ ਕੌੜਾ ਕੌੜਾ

ਕੋਈ ਤਾਂ ਤਰਸੇ ਮੁੱਠੀ ਭਰ ਅਨਾਜ ਨੂੰ
  ਕਿਸੇ ਦੇ ਘਰ ਡੁੱਲਦਾ ਜਾਵੇ   ਤੋੜਾ ਤੋੜਾ

ਸੁੰਗੜ ਦੀਆਂ ਗਈਆਂ ਨਦੀਆਂ ਉਥੋਂ ਵੀ
ਜਿੱਥੇ ਹੁੰਦਾ ਸੀ ਪਾਟ ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਚੌੜਾ ਚੌੜਾ

ਪਿਆਰ ਦਾ ਨਾਮ ਦੇ ਕੀਤਾ ਕੈਦ ਜ਼ਿੰਦਗੀ  ਨੂੰ
ਇਨ੍ਹਾਂ ਜ਼ੰਜੀਰਾਂ ਨੂੰ ਹੁਣ  ਦੱਸ ਕਿਵੇਂ ਤੋੜਾਂ ਤੋੜਾਂ

ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜਿਊਣਾ ਮੈਂਨੂੰ ਪਸੰਦ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ
ਖੁਸ਼ ਰਹਿਣ ਲਈ ਦੁੱਖਾਂ  ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਮੋੜਾਂ ਮੋੜਾਂ

Wednesday, 17 July 2024

ਮਾਂ ਕਹਿੰਦੀ ਸੀ

 ਮਾਂ ਕਹਿੰਦੀ ਸੀ

ਕਿਸੇ ਦੇ ਕਹਿਣ ਵਿੱਚ ਕਦੇ ਨਾ ਆਈਂ 

ਆਪਣੀ ਗ੍ਰਹਸਥੀ ਨੂੰ ਆਪ ਹੀ ਚਲਾਈ 

ਨਾ ਮਾੜਾ ਕਿਸੇ  ਨਾਲ ਬੋਲੀ ਨਾ  ਸੁਣੀ 

ਨਾ ਹੀ ਪੇਕੇ ਸਾਰਿਆ ਤੋਂ ਮਾੜਾ ਸੁਣਵਾਈ

ਮਾਂ ਕਹਿੰਦੀ ਸੀ

ਜੋ ਮਿਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਉਸ ਵਿੱਚ ਖੁਸ਼ ਰਹੀਂ

ਜੋ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਉਸਨੂੰ ਲੈਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੀਂ

ਬਿਨ ਗੱਲ ਅਪਣੇ ਦੁੱਖਾਂ ਨੂੰ ਨਾ ਫਰੋਲਦੀ ਰਹੀ

ਵੰਡ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਸਭ ਨੂੰ ਹੱਸਦੀ ਤੇ ਹੱਸਾਉਦੀਂ ਰਹੀਂ 

ਮਾਂ ਕਹਿੰਦੀ ਸੀ

ਉਸ ਦੀ ਦਿੱਤੀ ਸੀਖ ਪੱਲੇ ਬੰਨ੍ਹ ਜਿਉਂਦੀ ਰਹੀ

ਉਸ ਦੀ ਕਹੀ ਗੱਲ ਹੌਂਸਲਾ ਵਧਾਉਂਦੀ ਰਹੀ

ਹੱਸ ਖੇਡ ਬੀਤ ਰਹੀ ਹੈ ਸੋਹਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ

ਜੀਊਣ ਦਾ ਸੋਹਣਾ ਮੰਤਰ ਸਿਖਾਉਂਦੀ ਰਹੀ

ਮਾਂ ਕਹਿੰਦੀ ਸੀ

Monday, 8 July 2024

ਕਿਵੇਂ ਲਿਖਾਂ ਪਰੀਆਂ ਤੇ

     ਕਿਵੇਂ  ਲਿਖਾਂ ਪਰੀਆਂ ਤੇ 

ਕਈ ਵਾਰੀ  ਸੋਚਿਆ ਮੈਂ ਲਿਖਾਂ ਪਰੀਆਂ ਤੇ 

ਪਰ ਜਦ ਵੀ ਲਿਖਣ ਦੀ ਸੋਚੀ 

ਮੈਨੂੰ ਕੋਈ ਪਰੀ ਨਹੀਂ ਦਿਖੀ


ਮੈਨੂੰ ਦਿਸਿਆ ਔਰਤਾਂ ਪੱਥਰ ਕੁੱਟਦੀਆਂ ਹੋਈਆਂ 

ਰਸੋਈ ਚ ਖੜੀਆਂ ਪਸੀਨੋ ਪਸੀਨ ਹੋਈਆਂ 

ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਘਰਾਂ ਚ ਕੰਮ ਕਰਦੀਆਂ 

ਮੈਂ ਜਦ ਵੀ ਦੇਖਿਆ ਕਿਸੇ ਵੀ ਔਰਤ ਨੂੰ

 ਉਹ ਮੈਨੂੰ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਰਦੀ ਹੀ ਦਿਖੀ 


ਹਰ ਦਮ ਆਪਣੇ ਹੰਝੂਆਂ ਨੂੰ ਲਕਾਉਂਦੀ ਹੀ  ਦਿਖੀ 

 ਮੈਂ ਕਿਵੇਂ ਲਿਖਾਂ ਗੱਲ ਕਿਸੇ ਪਰੀ ਦੀ 

ਜਾਂ ਪਰੀਆਂ ਵਾਂਗ ਖੁਸ਼ ਰਹਿਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸੇ ਔਰਤ ਤੇ 

 ਮੈਂ   ਤਾਂ ਲਿਖ ਸਕਦੀ ਹਾਂ 

 ਸਿਰਫ਼ ਔਰਤਾਂ ਦੇ ਸੰਘਰਸ਼ ਦੀ ਗਾਥਾ 

ਕਿਉਂਕਿ ਮੈਂ  ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਰੋਜ ਦੇਖਦੀ ਹਾਂ 

ਪਰ ਪਰੀਆਂ ਤੇ ਕਿਵੇਂ ਲਿਖਾਂ 

ਚਾਹ ਕੇ ਵੀ ਮੈਂ ਕੁਛ ਲਿਖ ਨਹੀਂ ਸਕਦੀ

ਮੈਨੂੰ ਕੋਈ ਔਰਤ, ਕੋਈ ਬੱਚੀ ਕਦੇ ਵੀ 

ਪਰੀਆਂ ਵਰਗੀ ਨਹੀਂ ਦਿਖੀ

    

Friday, 28 June 2024

पेड़ की व्यथा

नकार  कर अहमियत मेरी

छुपा कर मेरे सारे गुणों को 

लगा कर खूबसूरत गमले में

काट छांट मेरी टहनियों को

बना दिया मुझको बौनसाई

पत्थर कंक्रीट के घर का 

 सजा लिया  एक कोना

 मैं समझ नहीं पाया

 उसने मुझे किया छोटा

 या खुद को कर डाला बौना 

Tuesday, 18 June 2024

मेरी खिड़की

 मेरी खिड़की से सब दिखता है

 चांद तारे हवा सूरज

 नहीं दिखते तो बस आते जाते लोग 

आपस में बतियाते हंसते हुए

नन्हें बच्चों किलकारियां मारते हुए

बिस्तर पर पड़े पड़े जो दिखता है

 उसको महसूस करती हूं

 और जो नहीं दिखता 

उसकी कल्पना करके

खुद को खुश कर लेती हूँ

Monday, 27 May 2024

अमलतास

        अमलतास

जेठ की तपती दुपहरी में

 सड़क के किनारे चलते हुए 

देख कर अमलतास के फूलों को

 गर्मी से कुम्लाहे चेहरे पर भी 

आ जाती है हल्की सी मुस्कान 

खिल उठता है मन भी 

तेरे सुनहरी फूलों की तरह

मन की मुस्कान के साथ-साथ 

उतर जाती है तन की थकावट भी

खड़े रहो ऐसे ही इस्तकबाल करते  हुए

Tuesday, 21 May 2024

ਚਾਹ

 ਕਲਿਆਂ ਬੈਠਕੇ ਚਾਹ ਪੀਤੀ ਤਾਂ ਕੀ ਪੀਤੀ

ਆਵਦੇ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕੀਤੀ ਤਾਂ ਕੀ ਕੀਤੀ 

ਚਾਹ ਪੀਣ ਦਾ ਸਵਾਦ ਤਾਂ ਹੈ ਦੋਸਤਾਂ ਨਾਲ 

ਕੁਝ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਸੁਨੀ ਤੇ ਆਵਦੀ ਕੀਤੀ 


 


Wednesday, 8 May 2024

पत्थर की पीड़ा

 

साहिल के किनारे बैठ
हवा संग आती जाती
लहरों को ताकना
नहीं है मकसद मेरा
मैं पीड़ा जानना चाहती हूं
उन पत्थरों की भी जो  टूटते रहते हैं
छोटे-छोटे टुकड़ों में
बनते रहते हैं हिस्सा
अविरल बहते समुद्र का
अपनी पहचान गवा कर

Sunday, 28 April 2024

इच्छाएँ

 

चांद के आकार की तरह
घटती बढ़ती इच्छाएं
कभी पूर्णमासी के चांद सी
परिपूर्ण
कभी अमावस के
चांद सी  निल
कभी ढेर सारी
और कभी एक आध
जिंदगी के साथ
कदमताल करती हुई

Thursday, 18 April 2024

हाल मेरे गाम का

 

मेरे गाम का के हाल तू बुझै सै रै भाई
ऐकले पड़ रहे है इते सारे  लोग लुगाई

अनपढ़ करे सै मजूरी सहर मै जाके
पढ़े लिखे नै तो  ब्याज मै जमीन गवाई

पुरखिया की जमीन  बंट गई आपस में
जिसके खातर करै कचहरी और लड़ाई

बीतै भर का खेत आ गया सबकै हिस्से में
कित बोवैं फसल अर किस की करै कटाई

गुजारे लायक भी फसल जद ना देंवे खेत
के करै शहर में जाकर ना करै गर कमाई

Wednesday, 17 April 2024

ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ

 ਮੇਰੀ ਹੋਂਦ ਤੇ ਸਵਾਲ ਖੜੇ ਕੀਤੇ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ 

ਮੇਰਾ ਜੀਵਨ ਮੂਹਾਲ ਕੀਤਾ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


ਲੜ ਤੇਰੇ ਲੱਗ ਛੱਡ ਦਿੱਤੀ ਦੇਹਰੀ ਪੇਕਿਆਂ ਦੀ 

ਪਰ ਸ਼ਕ ਦੇ ਘੇਰੇ 'ਚ ਰਹੀ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


ਹਮਸਫ਼ਰ ਬੰਨ੍ਹ ਟੁਰਦੀ ਰਹੀ ਨਾਲ ਤੇਰੇ ਹਰ ਪਲ

ਜਿਉਣਾ ਛੱਡ ਜਿਊਦੀਂ ਰਹੀ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


ਹੂਣ ਜਦੋਂ ਸੋਚ ਲਿਆ ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਵੱਖ ਹੋਕੇ ਜਿਉਣ ਦਾ

ਗੱਲਾ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪਏ ਲੋਕ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


ਇਕ ਨਵਾਂ ਮੁਕਾਮ  ਤਾਂ ਹਾਸਲ ਕਰ ਹੀ ਲਉਂਗੀ 

ਛੱਡ ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਹੋਨਾ  ਨੀਲਮ ਕਦੇ  ਕਿਵੇਂ ਕਦੇ ਕਿਵੇਂ


Sunday, 7 April 2024

दूरियाँ

 

कहीं सहरा में दफन कर दे मजबूरियां
रह दिल के पास मिटा दे यह सारी दूरियां

कहने सुनने को कितना अच्छा लगता है
पर क्या आसान है छोड़नी ये दुश्वारियां

गुस्सा गिला दुख अतीत परेशानी नाकामी
जिंदगी में साथ चलती रहती है ये रवानियां

क्यूँ छोड़ इनको आगे बढ़ नहींं पाते हम
चाहे हर कदम रंग दिखाती है पशेमानियां

खुद के अंदर जिंदा रख एक मासूम बच्चा
दे इजाजत करने की उसको  मनमानियाँ
        नीलम नारंग

Sunday, 24 March 2024

तेरे आने के बाद

       तेरे आने के बाद

कुछ सुकून सा मिला तेरे आने के बाद 

जिंदगी अपनी सी लगी तेरे आने के बाद


बेवजह भटक रही थी अनजान राहों पर

जीने की  वजह मिली  तेरे आने के बाद 


जिन खुशियों ने मुंह मोड़ लिया था मुझसे 

गमों को परे हटाने लगी हैं  तेरेआने के बाद 


वक़्त से पहले बूढ़ी हो गई थी जो मैं

जवान समझने लगी  हूँ तेरे आने के बाद 


चल  फिर से दोनों एक नई दुनिया बसाएं

हर तरफ बहार नजर आई तेरे आने के बाद 


Saturday, 16 March 2024

इश्क़

 इश्क़ तो ऐसी अनकही सी दास्ताँ है

हो जाए जिससे रहता उसी से वास्ता है

भूलना चाहने पर भी भूल नही सकता

बन जाता वही मंजिल और रास्ता है


Friday, 15 March 2024

ख्याल

 ख्यालों में रहता जिनका ख्याल है 

वह हरदम  ही पूछता एक सवाल है

तुम क्यूँ ना बन सकी  मेरी हमसफ़र

उम्र गुजर गई रहा अब तक मलाल है 


    

Saturday, 9 March 2024

जुगनू

 एक जुगनू जो अंधेरे को चीर कर मेरे पास से गुजर गया

मैं भी दुख को वहीं छोड़ उसके पीछे ही निकल गया

नसीहत दे मुझे उम्र भर के लिए वो अंधेरे को चीरता चला गया


उसके दिए हौसले से  मैं भी जिंदगी को जीतता चला गया


Thursday, 7 March 2024

साथ में

 चिंगारी तेरे प्यार की अभी भी 

दबी हुई है दिल की राख में

मत हवा दो भड़क जाएगी

मिटा देगी सब कुछ खाक में

बहुत याद आते हो आज भी

तकिया हो जाता है नम रात में

अच्छा है भूल जाएं  अतीत को

सुखे पत्ते कभी जुड़े हैं शाख में

मस्ती मनमर्जी जो की थी कभी

काश अब भी करें फिर साथ में




Friday, 1 March 2024

फूल

 

जो मिला नहीं उसका गिला नही
लंबा चलना यह सिलसिला नहीं
महत्व है उस फूल का भी अपना
परिस्थितिवश जो कभी खिला नहींं

Sunday, 25 February 2024

मिल

 तेरे नाम से जो धड़कने लगा है दिल

अब तो लगे ना मन कहीं आकर मिल

वही धूंधली सी शाम और तेरा साथ हो

वक़्त के दिए जख्मों को आकर सिल 




Wednesday, 21 February 2024

सुख

 सुख नहींं ठहरे तो दुख की बिसात क्या

गिरा दें मनोबल ऐसी इनकी औकात क्या

जैसा जीवन मिला है उसी में मुस्कुराना 

रब की रजा में रहना नहींं है सौगात क्या


Monday, 19 February 2024

बात

 जो बात दिल में रह गई

वो बात आंख कह गई

किया इंतजार रहबर तेरा

फिर रात विरह में ढह गई

शब भर गीला रहा तकिया

यूँ   रात में सिसकी  बह गई


Saturday, 3 February 2024

पानी

 दिनभर धूप में अठखेलियाँ करता रहा

समंदर की लहरों से बहता हुआ पानी

रात को चाॅंद की मद्दम सी रोशनी में

किसकी याद में दिखा खोया हुआ पानी

Wednesday, 31 January 2024

सुकून

 खुद के लिए थोड़ा सा सूकून ढ़ूंढ़

जीने के लिए थोड़ा सा जूनून ढ़ूंढ़


इतना भी मुश्किल नही है खुश रहना 

बस अपने जैसे दोस्तों का हुजूम ढ़ूंढ़


निकल जा कभी अनछुई सी जगह पर

देवदार के घने पेड़ों के बीच सुरूर ढ़ूंढ़


वक़्त में खो जाता है प्यार अकसर ही 

खुद में जिंदा रखने के लिए वो नुपूर ढ़ूंढ़


जो चला गया उसे दुआ दे खुश रहने की

खुद को खुश रखने के लिए नया तुरूप ढ़ूंढ़


समंदर की लहरों में बैठ शांति से दो घड़ी

प्यार को याद कर क्षितिज का सुदूर ढ़ूंढ़


खोए हुए वक़्त की याद में ना बरबाद कर

खुद की खुशी के लिए नीलम हुज़ूर ढ़ूंढ़

Thursday, 25 January 2024

बातें तेरी

 तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी 

वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी


खुश रखने का अलग वो अंदाज तेरा

रुठ जाने पर नएअंदाज से मनाना तेरा 

आशिकी  आंखों की  और चाहतें तेरी 


बिखरी हुई सी जिंदगी को समेटना तेरा 

छोटी छोटी  खुशियों को सहेजना तेरा 

 कैसे भूल सकती हूँ  दी वो राहतें तेरी 


बहुत कम समय मेरे साथ रहना तेरा 

खामोश लबों से बहुत कुछ कहना तेरा 

 याद आती हैं आंखों की शरारतें तेरी 


तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी 

वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी

Thursday, 18 January 2024

याद आए हैं

 गाँव आए हैं

देखने फिर से अपना गाँव आए हैं। 

सहेजने कुछ पुरानी याद आए हैं।। 


शहरों ने दी रोजी रोटी बहुत कुछ। 

लेने खाने में तृप्ति, स्वाद आए हैं।। 


थका दिया भागमभाग जिंदगी ने। 

गाँव में लेने सूकून की छांव आए हैं।। 


शहर की आपाधापी में उलझ गया था। 

जिंदगी में ना जाने कितने घाव खाए हैं।। 


बुड्ढा हो गया था वक्त से पहले नीलम। 

अपनों से चेहरे पर नए हावभाव आए हैं।।