तेरे नाम से जो धड़कने लगा है दिल
अब तो लगे ना मन कहीं आकर मिल
वही धूंधली सी शाम और तेरा साथ हो
वक़्त के दिए जख्मों को आकर सिल
तेरे नाम से जो धड़कने लगा है दिल
अब तो लगे ना मन कहीं आकर मिल
वही धूंधली सी शाम और तेरा साथ हो
वक़्त के दिए जख्मों को आकर सिल
सुख नहींं ठहरे तो दुख की बिसात क्या
गिरा दें मनोबल ऐसी इनकी औकात क्या
जैसा जीवन मिला है उसी में मुस्कुराना
रब की रजा में रहना नहींं है सौगात क्या
जो बात दिल में रह गई
वो बात आंख कह गई
किया इंतजार रहबर तेरा
फिर रात विरह में ढह गई
शब भर गीला रहा तकिया
यूँ रात में सिसकी बह गई
दिनभर धूप में अठखेलियाँ करता रहा
समंदर की लहरों से बहता हुआ पानी
रात को चाॅंद की मद्दम सी रोशनी में
किसकी याद में दिखा खोया हुआ पानी