बिन मेरे
जब वो मेरे शहर में आए होगें
शाम के धुँधलके तब छाए होगें
डाल हाथों में हाथ घुमे थे कभी
सुहाने मंजर तो वो याद आए होगें
हुक सी तो उठी ही होगी सीने में
जब बादल आसमाँ में छाए होगें
ढूँढ रहे होगें शहर की गलियों में
हर कहीं अक्स मेरे नजर आए होगें
मुहब्बत में ये कैसी बेबसी होती है
दिल की बात को ना बता पाए होगें
हँस हँसकर बातें की होगी सबसे
कैसे नम आँख के कोर छुपाए होंगे
बैठे होगें महफिल में साथ सबके
उनमें भी आए नजर मेरे साए होगें
करवटें बदली होंगी रात बिस्तर पर
क्या जख्म किसी को दिखाए होगें
अपने दर्द को दिल में ही दबाए होगें
नीलम जब वो मेरे शहर में आए होगें
बिछड़ कर
उसके जाने के बाद पैगाम आने लगे
कयूँ यादों के साथ सलाम आने लगे
बिखर गए थे जो मोती कभी टूटकर
वो माला बनाने के काम आने लगे
छोड़ आए थे जिन्हें किसी मोड़ पर
जुबां पर उनके ही नाम आने लगे
खुश हुए थे कभी जिनकी वजह से
याद वो किस्से पुराने तमाम आने लगे
रूक गई थी जो जिन्दगी किसी के लिए
रूकी सी जिन्दगी में नए मुकाम आने लगे
बीता दी उम्र जिसको तन्हाई में याद करके
उसके जाने पर इश्क के इल्जाम आने लगे
चाहा था कभी जिसे दिल की गहराई से
गए तो पीर फकीर याद सब धाम आने लगे
कट रही है जिन्दगी पुरानी यादों के सहारे
नीलम बिछड़ कर जीने केअंजाम आने लगे
मजबूर हो गए
तुझ से दूर होकर खुद से ही दूर हो गए
कयूँ अपनी चाहतों से ही मजबूर हो गए
ना तुझे बेवफा कह सके ना खुद को
वक्त के ढाए सितम से ही चूर हो गए
हर दम ही रहते थे जो नजरों के सामने
वो किसी ओर की आँख का नूर हो गए
बंद कमरे में हुई थी फक्त चंद मुलाकातें
जमाने में जाने कैसे किस्से मशहूर हो गए
नीलम तो आज भी सलामती चाहती है
क्या हुआ गर आज तुम मगरूर हो गए