Thursday, 29 July 2021

बिन मेरे

            बिन मेरे

जब वो मेरे शहर में आए होगें
शाम के धुँधलके तब छाए होगें

डाल हाथों में हाथ घुमे  थे कभी
सुहाने मंजर तो वो याद आए होगें

हुक सी तो उठी ही होगी सीने में
जब बादल आसमाँ में छाए होगें

ढूँढ रहे होगें शहर की गलियों में
हर कहीं अक्स मेरे नजर आए होगें

मुहब्बत में ये कैसी बेबसी होती है
दिल की बात को ना बता पाए होगें

हँस हँसकर बातें की होगी सबसे
कैसे नम आँख के कोर छुपाए होंगे

बैठे होगें महफिल में साथ सबके
उनमें भी  आए नजर मेरे साए होगें

करवटें बदली होंगी रात  बिस्तर पर
क्या जख्म किसी को दिखाए होगें

अपने दर्द को दिल में ही दबाए होगें
नीलम जब वो मेरे शहर में आए होगें
          





Sunday, 18 July 2021

बिछड़ कर

               बिछड़ कर

उसके जाने के बाद पैगाम आने लगे
कयूँ यादों के साथ सलाम आने लगे

बिखर गए थे जो मोती कभी टूटकर
वो माला बनाने के काम आने लगे

छोड़ आए थे जिन्हें  किसी मोड़ पर
जुबां पर उनके ही नाम आने लगे

खुश हुए थे कभी जिनकी वजह से
याद वो किस्से पुराने तमाम आने लगे

रूक गई थी जो जिन्दगी किसी के लिए
रूकी सी जिन्दगी में नए मुकाम आने लगे

बीता दी उम्र जिसको तन्हाई में याद करके
उसके जाने पर इश्क के इल्जाम आने लगे

चाहा था  कभी जिसे दिल की गहराई से
गए तो पीर फकीर याद सब धाम आने लगे

कट रही है जिन्दगी पुरानी यादों के सहारे
नीलम बिछड़ कर जीने केअंजाम आने लगे




























Thursday, 8 July 2021

मजबूर हो गए

             मजबूर हो गए


तुझ से दूर होकर खुद से ही दूर हो गए
कयूँ अपनी चाहतों से ही मजबूर हो गए

ना तुझे बेवफा कह सके ना खुद को
वक्त के ढाए सितम से ही चूर हो गए

हर दम ही रहते थे जो नजरों के सामने
वो किसी ओर की आँख का नूर हो गए

बंद कमरे में हुई थी फक्त चंद मुलाकातें
जमाने में जाने कैसे किस्से मशहूर हो गए

नीलम तो आज भी सलामती चाहती है
क्या हुआ गर आज तुम मगरूर हो गए