करवाचौथ और दिखावा
देश के एक क्षेत्र विशेष की परम्परा करवाचौथ का व्रत बाजारवाद के कारण अन्य राज्यों में अपनी पैठ बिठा रहा है। अब ये उपवास कम उपहास का एक रूप बनता जा रहा है । औरतों में होड़ लगी हुई होती है कपड़े, श्रृंगार और गहनों को लेकर। पति और सास ने क्या दिया या मायके से करवे पर क्या आया और कई बार इसी बात को लेकर कई दिनों तक घर में तनाव का माहौल भी रहता है । माना परम्पराओं और संस्कृति को बनाए रखना और निभाना बहुत अच्छा है लेकिन उसकी आड़ में दिखावा कैसा । कल फेसबुक और वहटसअप देखते हुए मैनें उन औरतों की भी व्रत करते हुए की फोटो देखी जो कई सालों से पति से अलग रह रही है या जिन्होंने तलाक लिया हुआ है । कल से इसके पीछे का औचित्य ढूँढ रही हूँ।Wednesday, 27 October 2021
Thursday, 21 October 2021
प्यार बाकी है
प्यार बाकी है
मेरे दिल में तेरे हिस्से का प्यार बाकी है
आज भी करना तेरा इंतजार बाकी है
चाहतों पर कब किसका बस चला है
कुछ अधूरे वादे कुछ करार बाकी है
तुझे पाने के लिए बरसों भटकी दर बदर
चल आ चलें अभी एक मजार बाकी है
जानती हूँ चाहत तो है तुम्हें भी है मुझसे
ये अलग बात है अभी इजहार बाकी है
ढूंढ़ ही लेते हो रास्ते मुझसे दूर रहने के
तुझे पास बुलाने के मौके हजार बाकी है
क्या खुशी से जी पाओगे मुझसे दूर रहकर
कयूँ नहीं कर लेते अभी जो इसरार बाकी है
कयूँ बेवजह की जिद ये कैसी तकरार बाकी है
हो ही जाओगे मेरे नीलम का एतबार बाकी है
Thursday, 7 October 2021
बेवजह
बेवजह
जिन्दगी के दाग दिखाए नही जाते
कुछ राज सबको बताए नही जाते
मिल जाते है कुछ खुशनसीब ऐसे
जिनसे जख्म सारे छिपाए नही जाते
साथी तो बहुत है हाथ थामने वाले
सब के लिए हाथ बढाए नही जाते
मजाक बना लेते है दिल की बात का
सबको अपने सपने सुनाए नहीं जाते
रुलाने के लिए तैयार बैठा है हर कोई
सबके लिए तो आँसू बहाए नहीं जाते
कभी तो बात कर मुझसे हकीकत की
सपनों के शहर में घर बसाए नहीं जाते
मुस्कुराने की फितरत को यूँ ही रख
बेवजह नीलम दिल जलाए नहीं जाते
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