1222 1222 1222 1222
जियेंगे साथ हम दोनों अभी तो जज्बात बाकी है।
करें हम मन की बातें कुछ अभी तो रात बाकी है ।।
दिए जो वक़्त ने जख्म उनसे झुक गया हूँ
मिली है जिंदगी से शह अभी ये मात बाकी है।।
दिखाएं हैं तुझे दिलकश नजारे जो मुहब्बत में।
इतर उनसे सहन करना अभी ये घात बाकी है।।
लुटाना चाहता था इश्क़ में सब कुछ तुम्हें अपना।
मैं डरता हूँ बतानी जो अभी ये जात बाकी है।।
खड़े हैं संत दरवाजे पे रख उम्मीद खाने की।
खिलाऊं किस तरह उनको बनाना जो अभी ये भात बाकी है।।
नवाजिश रुख है दरकार पानी की उसे नीलम
बचा ले सूखने से उसे अभी तो पात बाकी है
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