Friday, 21 November 2025

चटनी

       







चटनी

बहुत साल पीसी है मैंने 

चटनी सिलवटें पर

वह सिर्फ चटनी नहीं थी 

उसमें पिसे हुए थे

 मेरे कुछ जज्बात कुछ खुशी के लम्हे 

जो बीत ना पाए थे  साथ मेरे

धनिया  पुदीने  की पत्तियों के साथ 

पिसे हैं मैंने अपने ताजा  कोमल ख्वाब  इसी सिलबट्टे पर 

मुझ से पहले भी 

 कई बार पिस चुके हैं 

 उन औरतों के  सपने 

जिनके नरम पोटो ने छुआ है

मुझ से पहले  सिलबट्टे को 

 कई पीढ़ियों की औरतों को छला है

 मरहूम किया है अपने  सपनों से

 दूसरों की रोटी का स्वाद 

और भी स्वाद बनाने के लिए

 पर मैं नहीं चाहती मेरे बाद

कोई  छुए इस सिलबट्टे को

और पीस दे अपने अरमानों को

 चटनी के साथ साथ

 

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