Tuesday, 7 January 2025

1.इबादत

 212       2,   2122,  2     122, 212 

1जब मेरी चाहत  इबादत थी कजा कैसे हुई

खास थे कुछ लोग उनसे बेवफा कैसे हुई


2प्यार का तुहफा मिला था जो मुझे है याद वो

जिंदगी तुझसे मुहब्बत थी सजा कैसे हुई



जाने क्यों धोखा किया है दोस्ती के नाम पर

पारखी तेरी नजर मुझ से जुदा कैसे हुई


दीपकों ने साथ जलकर भी भगाया तीरगी

आँधियों में रोशनी घर से हवा कैसे हुई



भीड़ की खामोश नजरों ने दुआएं ही न कीं

जख्म ज्यों के त्यों रहे तो फिर दवा कैसे हुई

 

 जिन्दगी ने हर समय धोखे दिये नीलम तुझे

छोड़कर नफरत तेरी रोशन शमा कैसे हुई

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