212 212 1222
1.इससे बढ़कर न गम जमाने में
यार हो साथ जब हराने में
2.काटता जा रहा है पेड़ों को
वक़्त लगता जिसे उगाने में
जल गई निर्धनों की झोंपड़ियाँ
कुछ को आया मजा सताने में
मत दगा यार से करो यारों
इन से मिलती शफा निभाने में
खर्च करदी है ऊर्जा अपनी यूँ
बेवजह नील को दबाने में


