Monday, 30 December 2019

कदम ताल



                  कुछ समय से मै देख रही हूँ और  महसूस भी कर रही हूँ कैसे गाँव की लड़कियां शहरी लड़कियों के साथ कदम मिलाकर चलने की कोशिश कर रही है | जिन लड़कियों के पिता आर्थिक रूप से संपन्न है वो तो पी. जी . लेकर  रह  जाती  है  और अपनी पढाई पूरी कर रही है | जो लड़कियां आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है वो भी गांवों से आकर एक छोटा सा कमरा लेकर घर से थोडा सा सामान लाकर बहुत ही आभाव में रहकर सारा ध्यान अपनी पढाई पर केंद्रित कर रही है | उनकी हर संभव कोशिश है कि पढ़ लिख कर अच्छी जॉब करें और माँ बाप का सहारा बनें | सलाम है ऐसी सोच वाली लड़कियों को | 

Friday, 4 October 2019

एक किरण रोशनी की




अँधेरे में भी ढ़ूढ ली है एक किरण
रोशनी की
इंतजार है बस
रोशन कर लूँ
उस किरण से जहाँ अपना
छूना ही है जब आसमां
तो क्यूँ न
जिन्दादिली को बनाकर सीढ़ी
होंसले को मंजिल कर लूँ
अडचने जब कोई रोकेंगी राह
लगन से अपनी उसको आसानकर लूँ 

Friday, 27 September 2019

वक़्त

वक़्त ने किस मोड़ पर ला खड़ा किया है
सामने जिंदगी खड़ी  है
उसको देखकर मुस्कुरा तो सकती हूँ
गले नहीं लगा सकती
जिसको गले लगाया है
उसके साथ मुस्कुरा नहीं सकती
ये कैसी बेबसी है
जिसके साथ हूँ
उससे खुश नहीं हूँ
फिर भी उसके साथ रहना है
मजेदार बात ये है कि
 खुश भी रहना है 

Wednesday, 11 September 2019

धर्म की आङ में


                                          धर्म की आड़ में 

                  कुछ दिनों से रोज जब भी अखबार पढ़ती हूँ छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार की घटनाओं से मन बहुत दुखी होता है |  गरीब घर की छोटी लडकियां सबसे आसान शिकार होती हैं | बीमार  मानसिकता वाले लोग अपनी हवस पुरी करने के लिए किसी न किसी तरह लालच देकर या जबरदस्ती से बच्चियों को अपने पास बुला लेते हैं |
ये वो लड़कियां होती हैं जिनके माँ बाप कहीं मजदूरी करते हैं या खेतों पर काम करते हैं |  आदमी औरत दोनों के लिए काम करना जरुरी हो गया है | बच्चों को अकेले छोड़ना उससे भी बड़ी मजबूरी | इस तरह की घटनाएँ सारी मानव जाति के लिए शर्मनाक हैं | किसी भी समाज में किसी भी देश में इस तरह की घटनायें मानवता को शर्मसार करती हैं |
लेकिन आजकल जो चलन चल पड़ा है वो मुझे बहुत विचलित करता है कुछ लोग इसे भी हिन्दू मुस्लिम रंग देने की कोशिश करते है  जो किसी भी तरह से मान्य नहीं हो सकता | कैसी विडंबना है हमारे समाज की ? जिस बुराई को रोक नहीं सकते उसे सांपरदायिक रंग दे दो | लोगो को मुद्दे से ही भटका दो | कितनी शारीरिक व मानसिक यंत्रणा भुगतती है वो बच्ची व उसके माँ बाप |
बस  ! ये बुराई अब जड़ से ख़तम होनी ही चाहिए | अगर ऐसी बच्चियों के लिए कुछ नहीं केर सकते तो कम से कम धर्म की आड़ तो मत लो | 

Saturday, 17 August 2019

पानी की बर्बादी


बहुत दिनों से सुबह सैर पर जाने की सोच रही थी | आज रविवार था और नींद भी जल्दी खुल गई तो सोचा सैर ही कर ली जाए|  बड़े मन से और खुश होकर सैर के लिये घर से निकली | अभी कुछ दूर ही गई थी पड़ोस के एक घर से मोटर चलने और पानी की टंकी से पानी गिरने की आवाज आ रही थी | मै पानी की बर्बादी न देख सकी और मैने घेर की डोरबल बजा दी | काफी देर बाद एक आंटी ने दरवाजा खोला जब मैने उन्हें पानी गिरने और मोटर बंद करने को कहा तो उन्होंने बुरा सा मुहँ बनाया और मोटर बंद कर दी | लेकिन यह क्या बहुत से घरों से ऐसे ही पानी बह रहा था| मेरा सैर करने का सारा मूड ही खराब हो गया और मै सोचने लगी लोग पानी की इतनी बर्बादी क्यों करते है | माना  बड़े बड़े घरों में ज्यादा हॉर्स पावर की मोटर लगी हुई है इसका ये मतलब तो नहीं कि  पानी को इस तरह बर्बाद करे