ज्यादातर लड़कियों को घर में हिस्सेदार नही माना जाता । इसी विषय पर है मेरी कविता जिसका शीर्षक है माँ बाप का घर लड़की अपने भाई से पूछ रही है
माँ बाप का घर अकेले तेरा कैसे हुआजिस घर में जन्मी मै
उस घर में जन्मे तुम
एक साथ पले बढे
एक साथ लड़े हम
फिर माँ बाप का घर अकेले तेरा कैसे हुआ
तुम खेले सड़कों पर
मैनें घर को बुहारा
माँ के बीमार होने पर
रोटी के लिए मुझे पुकारा
फिर माँ बाप का घर अकेले तेरा कैसे हुआ
घर बनाने के लिए पत्थर ढोया
पानी के लिए नल मैनें चलाया
दुख सुख को एक साथ बिताया
अच्छा बुरा सब एक साथ निभाया
फिर माँ बाप का घर अकेले तेरा कैसे हुआ
कुछ पैसे देकर तुझे आगे पढाया
मुझसे माँ ने घर का काम कराया
आज तुझसे ज्यादा डिग्री पास मेरे
दुख में खुशी का अहसास कराया
फिर माँ बाप का घर अकेले तेरा कैसे हुआ