Tuesday, 27 December 2022

बेहाल

 मचा हर दिल में बवाल सा क्यूँ है

लगता हर शख्स बेहाल सा क्यूँ है


 दुख तनाव है सबकी जिंदगी में

जीना हुआ सबका मुहाल सा क्यूँ है


सबको लगते है खुदगर्ज दूसरे लोग

खुद को समझता खुशहाल सा क्यूँ है 


चल पड़े है अनजान सी डगर पर

हर शख्स दूसरे से बेख्याल सा क्यूँ है


कैसे कटेंगी रातें इन सर्द जाड़ों में

सबके जेहन में रहता सवाल सा क्यूँ है








Wednesday, 21 December 2022

अहा शीत

                       अहा शीत 

अहा मुझे बहुत भाती  प्यारी ऋतु शीत

गाजर का हलवा गोंद के लड्डू मेरे मीत


 पहन स्वेटर दुबके रहो रजाई में 

मस्त सपनों और नींद से गाढ़ी होती प्रीत


मूंगफली गज्जक रेवड़ी मन भर खाओ

अंधेरा देख भागते दोस्त मन होता भयभीत


भूख और पौष्टिकता में बना रहता मेल 

जब बाजरे की रोटी साग संग मिले नवनीत


बर्फ गिरे पहाड़ों में  यहाँ धुंध छा जाती है

कोहरे से लिपटा दिन फुर्र से जाता है बीत


अब मोबाईल टीवी से चिपके रहते बच्चे

ना मौसम का मजा लेते ना गाए इसके गीत 


             









Wednesday, 14 December 2022

रिश्तों से परे

 


           रिश्तों से परे 

रिश्तों से परे कुछ ऐसे  रिश्ते होते हैं 

बहुत प्यारे से कुछ फरिश्ते होते है 


दुख सुख में साथ निभा जाते हैं 

जिनसे मिलने को तरसते होते हैं 


दिल की  हर बात समझ जाते हैं 

मिलने पर बस नैन बरसते होते हैं 


सीखा देते हैं उड़ना खुले आसमाँ में 

हर दिन नए अरमान जगाते होते हैं 


मिलों दूर पर दिल के करीब होते हैं 

हर दम मिलने की आस जताते होते हैं 


  दुआ  के लिए जिसकी हाथ उठे होते हैं 

नीलम  के दिल मे जज्बात पिरोते होते हैं 


रिश्तों से परे कुछ ऐसे  रिश्ते होते हैं 

बहुत प्यारे से  कुछ फरिश्ते होते है