मचा हर दिल में बवाल सा क्यूँ है
लगता हर शख्स बेहाल सा क्यूँ है
दुख तनाव है सबकी जिंदगी में
जीना हुआ सबका मुहाल सा क्यूँ है
सबको लगते है खुदगर्ज दूसरे लोग
खुद को समझता खुशहाल सा क्यूँ है
चल पड़े है अनजान सी डगर पर
हर शख्स दूसरे से बेख्याल सा क्यूँ है
कैसे कटेंगी रातें इन सर्द जाड़ों में
सबके जेहन में रहता सवाल सा क्यूँ है