पहली नजर
मुझको याद है तेरी पहली सी वो नजर
हो रहे थे तब हम दुनियाभर से बेखबर
कुछ हसरतें संजोई थी उम्रभर के लिए
ना जाने लग गई कब दुनिया की नजर
दूर हो गए जाने कैसे एक दूसरे से
फिर ना कर पाए इक दूजे की कदर
फंस कर रह गए दुनिया के झंझटों में
कुछ इस तरह से होती रही बस बसर
जब आए फुर्सत से साथ रहने के पल
तब तक हाथ थामने वाला गया गुजर
जीने को जी रहे है खुश भी रहते है
अकेलापन सन्नाटा कहीं गया है पसर
अब तो बरसों गुजर गए हैं तुझे देखे हुए
नीलम को याद है वो तेरी पहली सी नजर
नीलम नारंग
सच्चा मित्र
खुशियों के आलम में
साथ मुस्कुरा गया
दुख भरे दिनों में
रोते को हँसा गया
जब भी कोई परेशानी आयी
वक़्त साथ बिता गया
आह निकली जब भी लबों से
दुआ सा होठों पे आ गया
राह चलते चलते थक गया कभी
हाथ उसका मेरे हाथों में आ गया
मुड़ा जब कभी किसी गलत राह पर
रास्ता सही दिखा गया
भटक गया जब किसी के बहकावे से
कदमों को मेरे संभाल गया
जब कभी आ घेरा किसी बीमारी ने
प्यार से माथा मेरा सहला गया
लगता है जन्मों का रिश्ता है तेरा मेरा
हरकदम साथ तू निभा गया
जीवन भर के संघर्ष में साथ रह
सही मायने में सच्चा मित्र हूँ मै
बिन बताए ये बता गया