Wednesday, 19 January 2022

पहली नजर

                पहली नजर


मुझको याद है तेरी पहली सी वो नजर
हो रहे थे तब हम दुनियाभर से बेखबर

कुछ हसरतें संजोई थी उम्रभर के लिए
ना जाने लग गई कब दुनिया की नजर

दूर हो गए  जाने कैसे एक दूसरे से
फिर ना  कर पाए इक दूजे की कदर

फंस कर रह गए दुनिया के झंझटों में
कुछ इस तरह से होती रही बस बसर

जब आए फुर्सत से साथ रहने के पल
तब तक हाथ थामने वाला गया गुजर

जीने को जी रहे है खुश भी रहते है
अकेलापन सन्नाटा कहीं गया है पसर

अब तो बरसों गुजर गए हैं तुझे देखे हुए
नीलम को याद है वो तेरी पहली सी नजर
                     नीलम नारंग



























Thursday, 13 January 2022

सच्चा मित्र

   सच्चा मित्र


खुशियों के आलम में
साथ मुस्कुरा गया
दुख भरे दिनों में
रोते को हँसा गया
जब भी कोई परेशानी आयी
वक़्त साथ बिता गया
आह निकली जब भी लबों से
दुआ सा होठों पे आ गया
राह चलते चलते थक गया कभी
हाथ उसका मेरे हाथों में आ गया
मुड़ा जब कभी किसी गलत  राह पर
रास्ता सही दिखा गया
भटक गया जब किसी के बहकावे से
कदमों को मेरे संभाल गया
जब कभी आ घेरा किसी बीमारी ने
प्यार से माथा मेरा सहला गया
लगता है जन्मों का रिश्ता है तेरा मेरा
हरकदम साथ तू निभा गया
जीवन भर के संघर्ष में साथ रह
सही मायने में सच्चा मित्र हूँ मै
बिन बताए ये बता गया