साहिल से
टकरा कर समुद्र साहिल से
मन में उठती तंरगों को
शांत कर लेता है
झरने से गिरता पानी
टकरा कर पथरीली चट्टानों से
शांति से बह निकलता है
कल कल बहती नदियाँ
टकरा कर अपने ही शिलाखंड से
संगीत को जन्म देती है
प्रकृति कितने सुन्दर सुर छेड़ती है