Thursday, 29 September 2022

इस जिंदगानी में

 दुख बहुत मिले  इस जिंदगानी में

देख इन गमों को बल पड़े पेशानी में


 कभी ढूँढनी चाही ही नहीं खुशियाँ

बस  हरदम घूमते   रहे परेशानी में


जिंदगी को लेकर बुने थे जो ख्वाब

बुलबुले की भांति बह गए पानी में


टूटा हुआ दिल लिए फिरते रहे यूँ ही

रो कर ही काट लिये दिन जवानी में


फिर एक दिन सोचा खुद के बारे में

आ गया उस दिन एक मोड़ कहानी में


जीने लगी अब एक नई सी दुनिया में

जिंदगी चलने लगी फिर से रवानी में


छोड़ सब गम खुद को दी  नई मुस्कान

छोड़ कर दिया खुद को हवा सुहानी में

 

अब समझ आया वो जिंदगी ही क्या

हंसते हंसते जो कट जाए आसानी में

              

                   

          

Saturday, 24 September 2022

ਬਚਪਨ

 ਅਜਿਹੇ ਵੀ ਕੁਝ ਵੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਜਗ ਤੋਂ ਪਿਆਰੇ ਜਿਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 


        ਅੱਜ ਵੀ ਉਸਦੀ ਯਾਦ  ਆਂਦੀ ਹੈ

      ਖਿੜਖਿੜ ਹੱਸਣ ਦੀ ਆਵਾਜ ਆਂਦੀ ਹੈ

       ਬੀਤ ਗਏ ਜਿਹੜੇ ਦਿਨ ਨਿਆਣਿਆਂ  ਦੇ 

     ਉਸਦੀ ਤਾਂ ਬਸ ਹੁਣ  ਯਾਦ ਰੁਆਂਦੀ ਹੈ


ਹਰ ਦਿਨ ਨਿਤ ਨਵੇ ਖੇੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

 ਇਹੋ ਜਿਹੇ ਵੀ ਕੁਝ ਵੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਜਗ ਤੋਂ  ਪਿਆਰੇ ਜਿਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 


       ਪੜ੍ਹਨ ਦੀ ਨਾ ਕੋਈ ਬਾਤ ਹੁੰਦੀ ਸੀ

    ਦੋਸਤਾਂ ਵਿਚ ਨਾ ਕੋਈ ਜਾਤ ਹੁੰਦੀ ਸੀ

ਹਰ ਵੇਲੇ ਹੱਸਣਾ ਖੇਡਣਾ ਤੇ ਖੁਸ਼ ਰਹਿਣਾ 

ਭੱਜਦਿਆਂ ਨਸਦਿਆਂ ਹੀ ਰਾਤ ਹੁੰਦੀ ਸੀ


ਖੇਡਣ ਨੂੰ ਬਸ ਰੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ

ਇਹ ਜੇ ਵੀ ਕੁਝ ਵੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਜਗ ਤੋ ਪਿਆਰੇ ਜੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 


         ਜਿੱਥੇ ਬੈਠੇ  ਔਖੇ ਹੀ ਖਾ ਲੈਂਦੇ ਸੀ 

         ਜੋ ਮਿਲਿਆ ਔਹੀ ਪਾ ਲੈਂਦੇ ਸੀ

     ਤੇਰ ਮੇਰ ਦੀ ਕੋਈ ਥਾਂ ਨਹੀਂ ਸੀ 

     ਚਾਚੇ ਮਾਮੇ ਤੋਂ ਵੀ ਕੁੱਟ ਖਾਂ ਲੈਂਦੇ ਸੀ


ਸਾਰੇ ਭੈਣ ਭਰਾ ਨੇੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਇਹਜੇ ਵੀ ਕੁਝ ਵੇਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ 

ਜਗ ਤੋਂ ਪਿਆਰੇ ਜਿਹੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸੀ

Tuesday, 20 September 2022

दिल के दीए

 

जी रहे हैं बुझा के दिल के दिए
हैं महफ़िल में दिल तन्हा लिए

क्या बताएं कि कैसे जी रहे हैं
आंसू बस पलकों ने ही है पिए

अब छोड़ दिया है दर्द में जीना
जब से छोड़ दुखों को लब सिए

डसने लगी थी दिल की तन्हाई
इसलिए महफ़िल से लगाए हि

कहने को रहती हूँ मै बहुत खुश
इसको पाने के लिए  जतन किए

तन्हा दिल और हर महफ़िल भाए
कुछ इस तरह नीलम जिंदगी जिए



Sunday, 18 September 2022

ये ख्वाब

 चुरा के आंखों से नींद रात भर जगाए

अधूरे ही रहेंगे पर ये ख्वाब मुझे भाए


चले आओ जिंदगी में कभी यूँ ही

क्यूँ ना हर लम्हा तेरे साथ ही बिताए


तन्हाई ने घर बना लिया है मेरे  दिल में

शायद गमों का बोझ ही हल्का हो जाए


जानती हूँ साथ ना निभा पाओगे उम्र भर

 कुछ कदम साथ चलने का वादा किया जाए 


दुखों ने साथ दिया है जिंदगी के हर मोड़ पर

फिर क्यूँ ना गमों को प्यार से सहलाया जाए


अधूरी  ख्वाहिशों के साथ जीना ही जिंदगी है

चलो हंसकर ही सही हसरतों को  दबाया जाए


दोस्तों की महफ़िल में मिल जाती है खुशी

नीलम हर हाल रूठे दोस्तों को मनाया जाए



Wednesday, 14 September 2022

औरत की पीड़ा

 ना में छिपी  ना को ना कब समझोगे 

बताओ मुझे इंसान कब समझोगे 


खुद पीड़ा सहकर जन्म देती हूँ जिसे 

मुझे  उससे ताकतवर कब समझोगे 


परेशानी में मेरे  ही पहलू में बैठते हो 

मुझसे कमजोर खुद को कब समझोगे 


कमाकर बनाकर खिला सकती  हूँ 

घर चलाने वाली बताओ कब समझोगे 


कमी निकालते हो मेरे कपड़ों में हरदम 

खुद की नजरों को संभालना कब समझोगे  


इज्ज़त औरत की ही क्यूँ उतरतीं है 

उतारने वाले को गुनहगार कब समझोगे 




Sunday, 11 September 2022

रिश्ते

 


           रिश्ते

कितने प्यार से पलते थे रिश्ते
सबसे प्यारे थे खून के रिश्ते

हवा चली कुछ ऐसी फिजा में
तार तार हुए सबसे प्यारे रिश्ते

छूटने लगे है अपने सगे संबंधी
हो गए जान से प्यारे बेगाने रिश्ते

खो गया प्यार मुहब्बत आपस में
पैसे से तूल गए थे जो प्यारे रिश्ते

संभाल लो वक़्त रहते इन रिश्तो को
धोखे की आँधी में उड़ न जाए रिश्ते

  दिल ना दुखाया करो माँ बाप का
दुनिया में ये दो ही हैं अनमोल फरिश्ते

बेरंग सी हो जाएगी दुनिया हमारी
जिंदगी में रंग भरेंगे ये प्यारे रिश्ते

सुख दुख कट जाएंगे आसानी से
साथ निभाने वाले होंगे प्यारे रिश्ते

सुकून से गर चाहते हो जीवन को
खुशी से थाम कर रखो प्यारे रिश्ते