गज़ल 28
122 122 122 12
1.गुजरती हुई शाम भी देख अब
जो आया वो पैगाम भी देख अब
2.पहाड़ों को काटा गया गर यूं ही
भुगतना ये परिणाम भी देख अब
3.तुझे प्यार मैनें किया रीझ कर
पुकारा तेरा नाम भी देख अब
4.निभाया है रिश्ता तुझी से है ना
किए सब्र का अंजाम भी देख अब
5. सभी अपनी कारों से चलते हैं नील
सड़क पर लगा जाम भी देख अब

No comments:
Post a Comment