.बसाया था जिसे सपनों में मैंने तुम ही तो थे ना
उठाए थे कभी नखरे हमारे भी तुम ही तो थे ना
2.नयामत जिंदगी बनती हमारी साथ चलने से
किया आसान मुश्किल राह को वो तुम ही तो थे ना
3.धर्म हथियार बन ठगता रहा सदियों से लोगों को
हवा नफरत की फैलाने में माहिर तुम ही तो थे ना
4.शिकारी जाल फैला कर पकड़ता मीन समुद्र में
जहाजों में चढ़ा निर्यात वाले तुम ही तो थे ना
5दिवस हिन्दी मना तौहीन करते रोज़ इस की भी
बधाई अंग्रेजी में यूँ देते तुम ही तो थे ना

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