Thursday, 30 January 2025

6 गज़ल

 

          6 गज़ल
122        122         122      122 
खलल तो डला पर  निकलते रहे हल
    वफा करने वाले  बदलते रहे दल

दुखों का रहा घेरा मेरे ही घर पर
     तेरे साथ जीकर गुजरते रहे पल

शज़र काट डाले क्यों फलदार हमने
जुदा हो शज़र से बिखरते रहे फल

ढका बादलों ने ही सूरज को ऐसे
बड़ी धुंध थी सब ठिठुरते रहे कल
 
यूँ मातम दुखों का न कर अब तू नीलम
तू कर इश्क़ रब से   महकते रहें पल
                         
                            

Tuesday, 21 January 2025

5. गज़ल

 

5. गज़ल
122  122    122 1 2
दिया दिल को धोखे का उपहार है
किया जो कपट  उस की ये हार है

बिगड़ने लगे बच्चे अब आजकल
नशा करता  बरबाद परिवार है

हमेशा जहाँ का नियम ये रहा
मिलन ओर जुदाई की दरकार है

वो रिश्ता हुआ  जी का  जंजाल ही
  बना दोगला जिस का किरदार है

ए नीलम चुनौती दे इस रीत को
बदल जाता लड़की का हकदार है





Monday, 20 January 2025

ਧੁੰਦਲੇ ਵਰਕੇ

 

     ਧੁੰਦਲੇ  ਵਰਕੇ 
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਪਾੜ ਦਿੱਤੇ ਨੇ
ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀ ਕਿਤਾਬ ਚੋਂ
ਜੋ ਕਰ ਰਹੇ ਸੀ ਮੈਨੂੰ ਪਰੇਸ਼ਾਨ
ਤੇ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦੀ ਰਾਹ ਚ
ਬਣ ਰਹੇ ਸੀ ਰੋੜਾ
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਪੈ ਗਏ ਸੀ ਪੀਲੇ
ਸਾਰ ਨਹੀਂ ਰਹਿ ਗਿਆ ਸੀ ਕੋਈ
ਨਾ ਹੀ ਕੋਈ ਅਹਿਮੀਅਤ ਰਹਿ ਗਈ ਸੀ
ਇਸ ਵਾਸਤੇ ਪਾੜ ਕੇ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤੇ
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਗਿੱਲੇ ਹੋ ਗਏ ਸੀ
ਵਕਤ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਹੰਝੂਆਂ ਨਾਲ
ਉਹ ਵੀ ਮੈਂ ਪਾੜ ਦਿੱਤੇ
ਭੁੱਲੇ वक़्त ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਵਾ ਕੇ
ਝਾਕਦੇ ਸੀ ਹਰ ਵੇਲੇ ਕੋੜਾ ਕੋੜਾ
ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਜੋ ਭਿੱਜੇ ਹੋਏ ਸੀ  ਚਾਸ਼ਨੀ ਦੇ
ਜਵਾਨੀ ਇਸ਼ਕ  ਤੇ ਬਚਪਨ ਦੀ ਨਾਦਾਨੀ ਦੇ
ਸੋਹਣੇ ਵਕਤ  ਨੂੰ ਕਰਵਾਉਂਦੇ ਸੀ ਯਾਦ
ਉਹ ਰੱਖ ਲਏ ਆਪ ਨੂੰ  ਖੁਸ਼ ਰੱਖਣ ਲਈ
ਹੱਸਦੇ ਸੀ ਮੈਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਥੋੜਾ ਥੋੜਾ
ਹੁਣ ਨਵੀਂ ਕਿਤਾਬ ਬਣਾਣੀ ਹੈ
ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਸੋਹਣੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਨਾਲ
ਸਜੀ ਹੋਈ ਅਰਮਾਨਾ ਤੇ  ਖਵਾਈਸ਼ਾਂ ਨਾਲ
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਖੁਸ਼ਨੁਮਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਆਸ ਤੇ
ਹਸਾਊਗੀ ਮੈਨੂੰ ਭੋਰਾ ਭੋਰਾ
ਏਸ ਲਈ ਕੁਝ ਵਰਕੇ ਪਾੜ ਦਿੱਤੇ ਨੇ
ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀ ਕਿਤਾਬ ਚੋਂ
    

Friday, 17 January 2025

4गज़ल

           गज़ल

गरीबी में पलकर बड़ा जो बनेगा
निसंदेह इंसाफ सबसे करेगा


निगाहें किसी की सदा दे रही है
जरा सोच तो  साथ कब तक चलेगा


गुजर तो रहे हैं गली से   यूँ उनकी   

 पता चलने पर क्या जमाना कहेगा


चले गाँव की ओर फिर घर संभाले
शहर में नही कोई किस्से सुनेगा


हमेशा  रखो उस खुदा पर भरोसा
परेशानियों से कहो दिन ढलेगा


Tuesday, 14 January 2025

3.गज़ल

 


फिजाओं में घूमा  नया इक फसाना
बना प्यार का फिर नया क तराना

यही सोचकर गम छिपाने लगा हूँ
क्यूँ ऐसे किसी ओर का दिल दुखाना

हराया अंधेरों को अपनी ही जिद से
न परवाह की क्या कहेगा जमाना

अदाओं से माना चलाती है जादू
है मुश्किल यूँ धोखे से मुझ को हराना

जिए जा रही हूँ मैं अपने लिए ही
मिली जिंदगी को है बस आजमाना
 

Sunday, 12 January 2025

2.गज़ल

 

           


मुहब्बत का  कैसा  चढ़ा ये नशा है
   कदम मेरा तेरी तरफ ही बढ़ा है


   तेरी रूह को छू रही है नफासत
हरफ दर हरफ  मैंने तुझको पढ़ा है


मिला साथ तेरा मुझे जिन्दगी में
तुझे देख दिल ये धड़कने.लगा है


इसी प्यार को याद करती रहोगी
हमारी कहानी सभी से जुदा है


चमकता रहा है सितारा हमेशा
बुलंदी  से नाता पुराना रहा है


विरासत  उलझती रही है हमारी
  बदलता हमेशा जमाना चला है


निखरने लगी हूँ  तुझे देख कर मैं
ऐ नीलम   हुई जिंदगी  एक नशा है

Tuesday, 7 January 2025

1.इबादत

 212       2,   2122,  2     122, 212 

1जब मेरी चाहत  इबादत थी कजा कैसे हुई

खास थे कुछ लोग उनसे बेवफा कैसे हुई


2प्यार का तुहफा मिला था जो मुझे है याद वो

जिंदगी तुझसे मुहब्बत थी सजा कैसे हुई



जाने क्यों धोखा किया है दोस्ती के नाम पर

पारखी तेरी नजर मुझ से जुदा कैसे हुई


दीपकों ने साथ जलकर भी भगाया तीरगी

आँधियों में रोशनी घर से हवा कैसे हुई



भीड़ की खामोश नजरों ने दुआएं ही न कीं

जख्म ज्यों के त्यों रहे तो फिर दवा कैसे हुई

 

 जिन्दगी ने हर समय धोखे दिये नीलम तुझे

छोड़कर नफरत तेरी रोशन शमा कैसे हुई

Thursday, 2 January 2025

नया साल

 

          नया साल
हर साल की तरह फिर  नया साल आया
बैठे-बैठे कुछ नया करने का ख्याल आया

खुशकिस्मत समझूँगा मैं अपने आप को
गर  एक भी चेहरे पर मुस्कान ला पाया

लेता रहा हूं बहुत कुछ समाज से हरदम
ढलती उम्र में  समाज को देने का वक्त आया

छोड़ दो अतीत की, बीते साल की बातें
इस्तकबाल करो ये जो नया सवेरा लाया

जूझ रहे हैं जो गम दुख एकाकीपन से
बन  उनकी हिम्मत बनना है उनका हमसाया

साथ खड़े होना सीख दुख में हर किसी के
पराया नहीं जैसे हो वह तेरा ही  मां जाया

समझूंगा खुद का जीवन बेकार ही गया
गर नफरत जात-पात के बंधन ना तोड़ पाया

साहित्य  से लोगों में देशप्रेम का जज्बा जगाया
नीलम ने साहित्यकार होने का फर्ज निभाया
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