Monday, 11 January 2021

खामोश सदाएँ

 खामोश सदाएँ 


बारहा आती हुई खामोश सदाओं को
यूँ कभी सबके साथ जताया नहीं करते

सीखा है खुश रहना हर हाल जिन्दगी में
अपनी परेशानियां यूँ बताया नहीं करते

क्या हुआ गम है तन्हाई है पीड़ा है
रब की नेमत को ठुकराया नहीं करते

जी लो बसा कर मीठी यादों को दिल में
वक्त ने जो दिया है उसे गवाया नहीं करते

जब चल ही पड़े है अंजान राहों पर
राह की मुश्किलों से यूँ घबराया नहीं करते

राह पर मिलेंगे लोग तुम पर हँसने वाले
डर से पगडंडी को रास्ता बनाया नहीं करते

यकीन रख खुद की हाथों की लकीरों पर
मेहनत छोड़ किस्मत को आज़माया नहीं करते

कदर नहीं जिनको आपकी उनके लिए
अपने हुनर को दाँव पर लगाया नहीं करते

खोने को कुछ नहीं चंद बेड़ियों के सिवा
वक्त अपना यूँ दूसरों पर जाया नहीं करते

उठ चल आगे बढ़ मंजिल को पाने के लिए
दूसरों की बातों में नीलम यूँ आया नहीं करते