Wednesday, 30 April 2025

गज़ल 15

 

गज़ल 15
122  122          122  12

1. खुदा तुझ से आती इनायत  रही
हमेशा से फिर भी  शिकायत रही

2.भटकते है इंसाफ को लोग अब
कहीं बिक हमारी  सियासत रही

3.लगे फैसला करने जो न्याय का
नही उन में कोई लियाक़त रही

4.बहाता रहा जो पसीना बशर
मिली उस को फिर भी हिकारत रही

5 दिखाता रहा राह सपनों की जो
उसी बाप से ही  खिलाफत रही

6 करे दान  संपत्ति  का 'नील' जो
उसी के ही हाथों नियामत रही

Tuesday, 22 April 2025

धरती और आसमां

 

   धरती और आसमां
आहें तो उन पक्षियों ने भी भरी होगी
जब हमने काट दिए पेड़
गिरा दिए  गए उनके घोंसले
वहाँ पर पड़े हुए उन पक्षियों के अंडे
अंडों को सेने की उम्मीद में
लौटे होंगे घोंसले की तरफ
गिरा घोंसला कटा पेड़ देख
उनके दिल पर क्या बीती होगी
फिर शायद समझौता कर लिया
उन  पक्षियों ने भी
बचाने को अपनी प्रजाति
बेशर्मी से घुस आए हमारे ही घर में
या शायद जुड़ा होगा नाता उनका
उस जमीन से भी कुछ
उस आसमान से भी
इसी खुश फैहमी  में शायद
चहकते फिरते हैं पंछी भी
जमीं ना सही आसमां तो अपना है
चल रही है कशमकश अभी भी
उनके मनरेगा में
और इंसान सोच रहा है
हथियाने को आसमां
    22.4.25

Sunday, 6 April 2025

12 गज़ल



 

12 . गज़ल


1222   1222  1  2     22  1222


1. मुहब्बत हो गई उनसे तो फिर तकरार क्या करना
झगड़ना इश्क में शिकवे गिले  बेकार क्या करना।


2.बगीचे में उगाये आपने फूलों को मेहनत से
तो उन फूलों का यूँ बाजार में व्यापार क्या करना


3 कभी  थी भीड़ का हिस्सा  अकेली हो गई अब तो
मगर हिम्मत नही हारी है बन लाचार क्या करना


4 सफेदी सी उतर आई है जो बालों में अब मेरे
शिकायत भी खुदा से ना रही अब यार क्या करना


5.है रोशन जिंदगी उस चांद से पहलू में बैठा जो
झरोखे से दिखे उस चांद का दीदार क्या करना


6.दिवाली ईद दोनों को मनाएं प्यार से मिलकर
करें नीलम दुआएँ  यूँ वतन   बेजार क्या करना