Wednesday, 31 January 2024

सुकून

 खुद के लिए थोड़ा सा सूकून ढ़ूंढ़

जीने के लिए थोड़ा सा जूनून ढ़ूंढ़


इतना भी मुश्किल नही है खुश रहना 

बस अपने जैसे दोस्तों का हुजूम ढ़ूंढ़


निकल जा कभी अनछुई सी जगह पर

देवदार के घने पेड़ों के बीच सुरूर ढ़ूंढ़


वक़्त में खो जाता है प्यार अकसर ही 

खुद में जिंदा रखने के लिए वो नुपूर ढ़ूंढ़


जो चला गया उसे दुआ दे खुश रहने की

खुद को खुश रखने के लिए नया तुरूप ढ़ूंढ़


समंदर की लहरों में बैठ शांति से दो घड़ी

प्यार को याद कर क्षितिज का सुदूर ढ़ूंढ़


खोए हुए वक़्त की याद में ना बरबाद कर

खुद की खुशी के लिए नीलम हुज़ूर ढ़ूंढ़

Thursday, 25 January 2024

बातें तेरी

 तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी 

वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी


खुश रखने का अलग वो अंदाज तेरा

रुठ जाने पर नएअंदाज से मनाना तेरा 

आशिकी  आंखों की  और चाहतें तेरी 


बिखरी हुई सी जिंदगी को समेटना तेरा 

छोटी छोटी  खुशियों को सहेजना तेरा 

 कैसे भूल सकती हूँ  दी वो राहतें तेरी 


बहुत कम समय मेरे साथ रहना तेरा 

खामोश लबों से बहुत कुछ कहना तेरा 

 याद आती हैं आंखों की शरारतें तेरी 


तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी 

वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी

Thursday, 18 January 2024

याद आए हैं

 गाँव आए हैं

देखने फिर से अपना गाँव आए हैं। 

सहेजने कुछ पुरानी याद आए हैं।। 


शहरों ने दी रोजी रोटी बहुत कुछ। 

लेने खाने में तृप्ति, स्वाद आए हैं।। 


थका दिया भागमभाग जिंदगी ने। 

गाँव में लेने सूकून की छांव आए हैं।। 


शहर की आपाधापी में उलझ गया था। 

जिंदगी में ना जाने कितने घाव खाए हैं।। 


बुड्ढा हो गया था वक्त से पहले नीलम। 

अपनों से चेहरे पर नए हावभाव आए हैं।।