बहुत वेग से आता है पानी
एक झटके में ही
बहा कर ले जाता है सब कुछ
पर कहां बहा कर ले जा पाता है
इंसान के हौसले उसकी उम्मीदें
जो कभी देखते हैं आसमान की ओर
कभी देखते हैं मदद के लिए
बढ़ रहे मजबूत हाथों की तरफ
जो भर देती है उनमें
फिर से जीने का हौसला
मजबूत कर देती है उनके कदम
जैसे एक तीली माचिस से रगड़ खाकर आग उत्पन्न करती है
ऐसे ही एक कमजोर हाथ को
जब मजबूत हाथ का सहारा मिलता है
तो वो मजबूत कदमों से
पानी में से
सूखी जमीन पर कदम रखते हुए
हौसलों की उड़ान पर सवार हो
रब की मरजी को तरजीह दे
सपनों के बीज बोने लगता है
फिर से नई उम्मीदों के साथ

No comments:
Post a Comment