Sunday, 6 April 2025

12 गज़ल



 

12 . गज़ल


1222   1222  1  2     22  1222


1. मुहब्बत हो गई उनसे तो फिर तकरार क्या करना
झगड़ना इश्क में शिकवे गिले  बेकार क्या करना।


2.बगीचे में उगाये आपने फूलों को मेहनत से
तो उन फूलों का यूँ बाजार में व्यापार क्या करना


3 कभी  थी भीड़ का हिस्सा  अकेली हो गई अब तो
मगर हिम्मत नही हारी है बन लाचार क्या करना


4 सफेदी सी उतर आई है जो बालों में अब मेरे
शिकायत भी खुदा से ना रही अब यार क्या करना


5.है रोशन जिंदगी उस चांद से पहलू में बैठा जो
झरोखे से दिखे उस चांद का दीदार क्या करना


6.दिवाली ईद दोनों को मनाएं प्यार से मिलकर
करें नीलम दुआएँ  यूँ वतन   बेजार क्या करना

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