सिला
मेरी चाहतों का नहीं सिला मिला
जिंदगी भर सबसे ही गिला मिला
खार ही आए मेरे हिस्से में तो
कभी कोई फूल नहीं खिला मिला
सपनों के साथ उड़ना चाहा जब
रीति-रिवाज का खड़ा किला मिला
मरहम लगाती रही उम्रभर जिसपर
हर बार जख्म वही छिला मिला
नदिया की धार सी बह निकली
लाख राह में अड़ा शिला मिला
जब तराश लिया वजूद अपना
फिर नीलम को सारा विला मिला