Tuesday, 21 October 2025

24 गज़ल

 




122         122       122      122


 ये  सखावत रहेगी यही तय हुआ था
बिछड़ना नही अब यही तय हुआ था

दिखे रंग कोई भी हम खुश रहें गे
लियाक़त रखेंगे यही तय हुआ था

.युवाओं   नशा छोड़ दो साथ  हम हैं
दिखाना है जज्बा  यही तय हुआ था

 फरिश्ता नहीं अब बनाना किसी को

मसीहा बनेंगे  यही तय हुआ था

न भटकेंगे अब राह हमसब  यूँ नीलम
नई राह खोजें यही तय हुआ था

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