Wednesday, 10 February 2021

याद नही करते

याद नहीं करते 

 कसकते से उन लम्हों को याद नहीं करते 
फिर ना मिलने की भी फरियाद नहीं करते 

 जानती हूँ माहिर हो शब्दों की जादूगरी में 
 वो प्यार भरे शब्द भी अब शाद नही करते 

 गुमनाम हो जाते है जो वक्त की आँधी में 
 पुकारने पर फिर वो कोई नाद नही करते 

 एक बार चले जो गए मझधार में छोड़कर 
 मनाने की कोशिश पर भी दाद नही करते

 छोड़ दिया है बीते वक्त को सपने की तरह
 छूटी हुई गलियों पर फिर नासाद नहीं करते 

 समय का चक्र जैसे भी बीता बीत गया 
वक्त बीते हुए वक्त पर यूँ वक्त बरबाद नहीं करते 

 मिल रही है थाह वक्त की मजबूरियों की 
 पर अब बीते वक्त पर कभी वाद नही करते

Monday, 1 February 2021

लाचार किया है

 लाचार किया है


कब मैंने अपनी चाहतों का इजहार किया है
फिर क्यूँ तुमने रुसवा सरे बाजार किया है

जुदा कर ली थी राहें अपनी बरसों पहले
फिर किस रिश्ते से अपना हकदार किया है

आरजू तो कभी रखी ही नहीं थी फूलों की
फिर तेरे लिए क्यूँ जिन्दगी को खार किया है

प्यार एक अहसास है जो दिल से बाबसतां है
कब किसने इसे जबरदस्ती स्वीकार किया है

माना तुमने इजहार कर दिया मोहब्बत का
जरूरी तो नहीं मैनें तुझसे ही प्यार किया है

दफन रहने दो सीने में इस इकतरफा प्यार को
कयूँ मानने पर इसे इतना मुझे लाचार किया है

जी लो दो दिन हँसी खुशी से जो मिला है
अपने लिए कयूँ दूसरों को खाकसार किया है

कुछ हासिल नहीं होगा झूठी हमदर्दी से
नीलम किसलिए इज्जत को तार तार किया