होठों पर मुस्कान आँख में नमी सी है
सब कुछ होते हुए भी कुछ कमी सी हैअनजान राह पर बनाने थे निशान
मंज़िल पाकर भी खिसकी जमीं सी है
होठों पर मुस्कान आँख में नमी सी है
सब कुछ होते हुए भी कुछ कमी सी हैपितृदिवस पर विशेष
एक नया ख्याल
एक कैंटीन पर कुछ पुरुष बैठे थे