Thursday, 29 August 2024

झीगूंर

 

झीगूंर
रात के सन्नाटे को चीरती
झींगूरों की आवाज
अंधेरे में रोशनी  बिखेरते
टिमटिमाते घुमते  जुगनू
ऐसा  प्रतीत होता है
मानो रास्ता दिखा रहे हो
अकेले चलने वाले राहगीर को
यह एहसास करवा रहे हो 
कि तुम अकेले नहीं हो इस राह में
हम भी तुम्हारे साथ है

Sunday, 25 August 2024

जन्माष्टमी

 जहां जन्माष्टमी आने पर 

मुसलमान सीते थे  

राधा कृष्ण की चोलियां

 ईद आने पर जिस शहर में 

हिंदू जुलाहे बनाते थे टोपियां

एक नेता भाषण क्या देकर गया

उस शहर की हर गली में

बन गई अलग अलग धार्मिक टोलियाँ

फिर नेताओं ने खेला एक खेल

पैसों से लगाई समर्थकों की बोलियाँ

मानवता हुई तार तार सड़कों पर

गली गली बिखरी टोपियां ओ चोलियां

Monday, 19 August 2024

ਕੜਤਣ

 


ਪੀ ਲੈਂਦੀ  ਮੈਂ ਸਾਰੀ ਕੜਤਣ ਜੇ ਪੀ ਸਕਦੀ 

ਊਨ੍ਹਾਂ ਦੋਸਤਾਂ ਦੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਸੀ ਬੰਦਗੀ 

ਖੁਸ਼ਨੁਮਾ ਮਹਫਿਲ ਸਜਦੀ ਸੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ

ਲਗਦਾ ਹੈ ਬਸ ਉਹੀ ਸੀ ਸੋਹਣੀ ਜਿੰਦਗੀ







Thursday, 8 August 2024

भीड़

             भीड़

भीड़ का कोई मजहब नही होता

कोई जात कोई रंग नही होता

ये होती है जरखरीद गुलामों की

अपने आप से कुठिंत मासुमों की 

भूल जाती है इंसानियत

खो जाता है व्यक्ति का वजूद अपना

समझ ही नही पाती 

कब भेंट चढ़ जाती है सियासतदानों की 

सब होते तो एक ही बिरादरी के हैं

कदर नही करते अपने इंसानों की 







Friday, 2 August 2024

सावन

      सावन

ईब का सावन कुछ न्यूं बरसया

ज्यों नैनन मै ते बरसे नीर

समझ गया यो बादल मैनें

मेरे मन मै समाई  सै घणी पीर 

कदे बरसया झमाझम

जद उठी घणी कसूती टीस 

कदै ढलकया बूंद पै बूंद

जद मिली आस की सीख

इसा सावन मत न दिखाईयों किसी न

जो डरके फेर किसे ताईं ना पावै प्रीत