Tuesday, 28 July 2020

देश के पहरेदार




                   देश के पहरेदार

          हो रही है कैसे  जिंदगी की
          गुजर बसर देख लो
        मच रही है हाय तौबा चारों ओर
       घुमा के नजर देख लो

      डूब रहे है लोग बाढ़ के पानी में
      मचा हाहाकार देख लो
     छोड़ कर हित जनता के नेता लड़ते
       वोट के खरीददार देख लो

       लड़ा देते है इंसान को इंसान से
       ऐसे देश के पहरेदार देख लो
       धर्म के नाम पर आपस में कटते मरते
        लोग जिम्मेदार देख लो

       करके झूठे वादे आ जाते राजनीति में
       नहीं होते सपने साकार देख लो
       लूट खसोट मचाते दूसरों को लड़वाते
       राजनीति के ठेकेदार देख लो 

Tuesday, 21 July 2020

अखबार आज का



                                     अखबार आज का

       अबूझ पहेलियों से भरा है अखबार आज का
       बस बता रहा जातीय समीकरण आज का

       पेज भरा हुआ है मौज मस्ती के विज्ञापनों से
      दूसरी ओर बेजार फटेहाल मजदूर आज का

      एक पेज पर है अधनंगी तस्वीरें औरतों की
     कुछ की मजबूरी कुछ मजा लेती आज का

      बांटते कम हैं राशन दिखावा करते ज्यादा
      कुछ इस तरह हो गया है सेवादार आज का

        हर तरफ डर परेशानी बढ़ता दायरा शक का
       बढ़ गया संक्रमण ख़राब है माहौल आज का

       ऐसे में भी लगे हैं बटोरने चोरी का धन माल
     कितना खुदगर्ज हो गया है इंसान आज का

      सच से कोसो दूर है नहीं जगह है समानता की
      अखबार नहीं  दिखा रहा झूठ फरेब आज का  

Tuesday, 14 July 2020

बूँद



                             बूँद
      जब भी भर जाती हो गुब्बार से
      दब जाती हो अपने ही बोझ से
      बरस के खुद को हल्का कर लेती हो

     गिर के धरती पर बन दूसरे की ख़ुशी
     बन पानी समा जाती हो धरती में
     बन बूँद कभी खुद को सीप कर लेती हो 

     पैदा कर देती हो चमक आँखों में
    लहलहाती फसल देखकर
    बन बूँद किसान को खुश कर लेती हो

     देखकर तुझे हर्ष उठता है प्रेमी
     साहस मिलता है प्रणय निवेदन का
    बन ख़ुशी प्रेमी की आँखें नाम कर लेती हो  

Tuesday, 7 July 2020

पहेली सी जिंदगी





                   जो कभी थी बहुत प्यारी मुझे
               अब बन गयी पहेली जिंदगी

             खुशियाँ ना रास आई इसको
             हो गयी कितनी अकेली जिंदगी

              थे हर तरफ हरियाली और गुलाब
              बन गयी जैसे फूल चमेली जिंदगी

              रिपु सी लगने लगी है अब 
              कभी थी जो प्यारी सहेली जिंदगी

             हारना तो मुझे भी नहीं है तुझसे
            सोच लूंगीमिली नई नवेली जिंदगी