Monday, 27 February 2023

लोरी

 


             लोरी

प्यार को शब्दों में ढालने की 

कितनी अच्छी प्यारी सी सोच 

किसी के मन में आई होगी

जब माँ ने लोरी बनाई होगी


काम में व्यस्त होगी

या हाथों से अशक्त होगी

और मुनिया रो पड़ी होगी

तब लोरी से ही बहलाई होगी


या तो बच्ची बीमार होगी

चलने फिरने से लाचार होगी

अपने दुख भूल जाए थोड़ी देर

प्यार से मां ने लोरी सुनाई होगी


कुछ  सपनों को हवा दी होगी

जिंदगी की कोई समझाइश होगी

बड़ा हो खो ना जाए कहीं

लोरी में  बात दोहराई होगी

इसलिए माँ ने लोरी बनाई होगी

        


Saturday, 18 February 2023

बिखर कर

 

बिखर सी जाती हूं कभी खुद में ही
कभी समेट लेती हूं खुद को खुद में ही
कभी असमंजस सी की डगर पर
चल निकलती हूँ अनजान राहों पर
कभी घंटों बैठी रहती हूं  मौन
कभी बच्चों सी खिलखिलाती हूँ
कभी  बैठ नदिया किनारे  बहा देती हूँ
अपने जज्बातों को बहते पानी में
कभी बांध लेती हूँ खुद को
अतीत की सुन्दर यादों के बंधन में
कभी ये यादें छलक जाती हैं
आंखों से मोतियों की लड़ी बनकर
कभी नये बनते टूटते बंधनों में ही
ढूंढती रहती हूं खुद को घंटों
खुद से ही समेटे हुए  खुद को
कभी खुद से जुदा करते हुए
         नीलम नारंग

Saturday, 11 February 2023

घाव

 

         घाव
धोखा देने लगते हैं जब  शहर के लोग
तब अपना गाँव याद करता हूं

चलते चलते थक जाता हूँ जब
तब पेड़ों की छांव याद करता हूँ

कैसा नासमझ बन गया हूँ मै
स्टीमर पर बैठ नाव याद करता हूँ

हंसते हुए जता जाते हैं अपनापन
अकेलेपन में वो भाव याद करता हूँ

आज भी बचपन की छुट्टियां और
नानी घर जाने का चाव  याद करता हूँ

जब कभी निराशा में थक जाता हूँ
तब अपनों के दिए घाव याद करता हूँ