Monday, 30 December 2019

कदम ताल



                  कुछ समय से मै देख रही हूँ और  महसूस भी कर रही हूँ कैसे गाँव की लड़कियां शहरी लड़कियों के साथ कदम मिलाकर चलने की कोशिश कर रही है | जिन लड़कियों के पिता आर्थिक रूप से संपन्न है वो तो पी. जी . लेकर  रह  जाती  है  और अपनी पढाई पूरी कर रही है | जो लड़कियां आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है वो भी गांवों से आकर एक छोटा सा कमरा लेकर घर से थोडा सा सामान लाकर बहुत ही आभाव में रहकर सारा ध्यान अपनी पढाई पर केंद्रित कर रही है | उनकी हर संभव कोशिश है कि पढ़ लिख कर अच्छी जॉब करें और माँ बाप का सहारा बनें | सलाम है ऐसी सोच वाली लड़कियों को |