Tuesday, 21 January 2025

5. गज़ल

 

5. गज़ल
122  122    122 1 2
दिया दिल को धोखे का उपहार है
किया जो कपट  उस की ये हार है

बिगड़ने लगे बच्चे अब आजकल
नशा करता  बरबाद परिवार है

हमेशा जहाँ का नियम ये रहा
मिलन ओर जुदाई की दरकार है

वो रिश्ता हुआ  जी का  जंजाल ही
  बना दोगला जिस का किरदार है

ए नीलम चुनौती दे इस रीत को
बदल जाता लड़की का हकदार है





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