Tuesday, 22 April 2025

धरती और आसमां

 

   धरती और आसमां
आहें तो उन पक्षियों ने भी भरी होगी
जब हमने काट दिए पेड़
गिरा दिए  गए उनके घोंसले
वहाँ पर पड़े हुए उन पक्षियों के अंडे
अंडों को सेने की उम्मीद में
लौटे होंगे घोंसले की तरफ
गिरा घोंसला कटा पेड़ देख
उनके दिल पर क्या बीती होगी
फिर शायद समझौता कर लिया
उन  पक्षियों ने भी
बचाने को अपनी प्रजाति
बेशर्मी से घुस आए हमारे ही घर में
या शायद जुड़ा होगा नाता उनका
उस जमीन से भी कुछ
उस आसमान से भी
इसी खुश फैहमी  में शायद
चहकते फिरते हैं पंछी भी
जमीं ना सही आसमां तो अपना है
चल रही है कशमकश अभी भी
उनके मनरेगा में
और इंसान सोच रहा है
हथियाने को आसमां
    22.4.25

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