Monday, 14 March 2022

मुस्कान

 


          मुस्कान

बहुत दिनों से छाया हुआ था कुहासा
घेरे हुए थी उदासियाँ
फैलता जा रहा था अँधेरा
मन के हर कोने में घर बना लिया था
एकाकीपन और निराशा ने
इन सब से ऊब कर चली आई
फिर से ढूँढने खुद को
स्मृतियों के बागान में
याद किए बचपन के वो दिन
जब खेलती थी मस्ती में
अँधेरा होने तलक बिना किसी फिक्र के
याद किए जवानी के वो दिन
जब बेवजह खिलखिलाती थी घंटो
मेरी उस निश्छल हँसी को देखकर
मुस्कुरा उठते थे वो चेहरे भी
जिनपर छाई रहती थी उदासी महीनों
याद किए वो दिन भी
जब बच्चों की मोहिनी मुस्कान से
मुस्कुरा उठी थी भूलकर सब रंजो गम
सालों से ये मुस्कान ही मेरी पहचान है
फिर  क्यूँ कर रही हूँ कैद अब खुद को
कयूँ ओढ़े  हूँ लबादा जिम्मेदारी का
सोचते ही छँट गए बादल निराशा के
फिर करीने से संवारे सफेद बाल
  फिर झुर्रीदार चेहरे पर आई मुस्कान 

Friday, 4 March 2022

जंग

                  जंग

जंग पर भेजने से पहले हर माँ रोई होगी
फिर  रोक आसूँ देख उसे मुसकाई होगी

हर हाल दुश्मन को फतह करके ही आना
मन ही मन होंठों पर यही दुआ लाई होगी

घर पहुंच जाए मेरा लाडला सही सलामत
उस पार भी है एक माँ सोच घबराई होगी

माँ तो माँ  है  इस पार की हो  या उस पार  
सलामती की दुआ उसके होठों पर आई होगी

युद्ध अपने आप में सबसे बड़ा मसला है
युद्ध से मसले हल करने में  सिर्फ बुराई  होगी

युद्ध से सबको सिर्फ तबाही मिलती है
आम जनता ने बार बार ही की ये दुहाई होगी

बेटा इस पार का मरे या मरे उसपार का
आँख तो बस हर औरत की भर आई होगी

अमन शांति भाईचारा  बना रहे सब ओर
नीलम के मन में बस यही दुआ आई होगी