खारी फितरत
एक तरफा इश्क की
बानगी तो देखिए
छोड़ देती हैं नदिया
अपनी शोखी अपनी चंचलता
आतुर हो उठती है मिलने को
उस प्रियतम से
जिससे ना मिली है कभी
ना जानती हैं जिसकी खारी फितरत को
हिस्सा बन जाती हैं उस विशाल समुद्र का
छोड़ अपना वजूद अपना अस्तित्व
खारी फितरत
एक तरफा इश्क की
बानगी तो देखिए
छोड़ देती हैं नदिया
अपनी शोखी अपनी चंचलता
आतुर हो उठती है मिलने को
उस प्रियतम से
जिससे ना मिली है कभी
ना जानती हैं जिसकी खारी फितरत को
हिस्सा बन जाती हैं उस विशाल समुद्र का
छोड़ अपना वजूद अपना अस्तित्व
बासमती चावल
बासमती चावल के खेतों के बीच
बनी सड़क पर से गुजरते हुए
जो महक उठती है
वो रच बस जाती है दिमाग में
मन करता है घंटों बैठे रहे वहीं
पर मंजिल पर पहुँचने की जल्दी
वंचित कर देती है उस सुख से
बढ़ जाते हैं आगे सफर पर
वक़्त की कमी को कोसते हुए
जहन से निकाल कर खुश्बू
खारी फितरत
एक तरफा इश्क की
बानगी तो देखिए
छोड़ देती हैं नदिया
अपनी शोखी अपनी चंचलता
आतुर हो उठती है मिलने को
उस प्रियतम से
जिससे ना मिली है
ना जानती हैं जिसकी खारी फितरत को
हिस्सा बन जाती हैं उस विशाल समुद्र का
छोड़ अपना वजूद अपना अस्तित्व