नकार कर अहमियत मेरी
छुपा कर मेरे सारे गुणों को
लगा कर खूबसूरत गमले में
काट छांट मेरी टहनियों को
बना दिया मुझको बौनसाई
पत्थर कंक्रीट के घर का
सजा लिया एक कोना
मैं समझ नहीं पाया
उसने मुझे किया छोटा
या खुद को कर डाला बौना
नकार कर अहमियत मेरी
छुपा कर मेरे सारे गुणों को
लगा कर खूबसूरत गमले में
काट छांट मेरी टहनियों को
बना दिया मुझको बौनसाई
पत्थर कंक्रीट के घर का
सजा लिया एक कोना
मैं समझ नहीं पाया
उसने मुझे किया छोटा
या खुद को कर डाला बौना
मेरी खिड़की से सब दिखता है
चांद तारे हवा सूरज
नहीं दिखते तो बस आते जाते लोग
आपस में बतियाते हंसते हुए
नन्हें बच्चों किलकारियां मारते हुए
बिस्तर पर पड़े पड़े जो दिखता है
उसको महसूस करती हूं
और जो नहीं दिखता
उसकी कल्पना करके
खुद को खुश कर लेती हूँ