Friday, 28 June 2024

पेड़ की व्यथा

नकार  कर अहमियत मेरी

छुपा कर मेरे सारे गुणों को 

लगा कर खूबसूरत गमले में

काट छांट मेरी टहनियों को

बना दिया मुझको बौनसाई

पत्थर कंक्रीट के घर का 

 सजा लिया  एक कोना

 मैं समझ नहीं पाया

 उसने मुझे किया छोटा

 या खुद को कर डाला बौना 

Tuesday, 18 June 2024

मेरी खिड़की

 मेरी खिड़की से सब दिखता है

 चांद तारे हवा सूरज

 नहीं दिखते तो बस आते जाते लोग 

आपस में बतियाते हंसते हुए

नन्हें बच्चों किलकारियां मारते हुए

बिस्तर पर पड़े पड़े जो दिखता है

 उसको महसूस करती हूं

 और जो नहीं दिखता 

उसकी कल्पना करके

खुद को खुश कर लेती हूँ