फिजाओं में घूमा नया इक फसाना
बना प्यार का फिर नया इक तराना
यही सोचकर गम छिपाने लगा हूँ
क्यूँ ऐसे किसी ओर का दिल दुखाना
हराया अंधेरों को अपनी ही जिद से
न परवाह की क्या कहेगा जमाना
अदाओं से माना चलाती है जादू
है मुश्किल यूँ धोखे से मुझ को हराना
जिए जा रही हूँ मैं अपने लिए ही
मिली जिंदगी को है बस आजमाना
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