मेरे गाम का के हाल तू बुझै सै रै भाई
ऐकले पड़ रहे है इते सारे लोग लुगाई
अनपढ़ करे सै मजूरी सहर मै जाके
पढ़े लिखे नै तो ब्याज मै जमीन गवाई
पुरखिया की जमीन बंट गई आपस में
जिसके खातर करै कचहरी और लड़ाई
बीतै भर का खेत आ गया सबकै हिस्से में
कित बोवैं फसल अर किस की करै कटाई
गुजारे लायक भी फसल जद ना देंवे खेत
के करै शहर में जाकर ना करै गर कमाई
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