Thursday, 7 March 2024

साथ में

 चिंगारी तेरे प्यार की अभी भी 

दबी हुई है दिल की राख में

मत हवा दो भड़क जाएगी

मिटा देगी सब कुछ खाक में

बहुत याद आते हो आज भी

तकिया हो जाता है नम रात में

अच्छा है भूल जाएं  अतीत को

सुखे पत्ते कभी जुड़े हैं शाख में

मस्ती मनमर्जी जो की थी कभी

काश अब भी करें फिर साथ में




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