खारी फितरत
एक तरफा इश्क की
बानगी तो देखिए
छोड़ देती हैं नदिया
अपनी शोखी अपनी चंचलता
आतुर हो उठती है मिलने को
उस प्रियतम से
जिससे ना मिली है कभी
ना जानती हैं जिसकी खारी फितरत को
हिस्सा बन जाती हैं उस विशाल समुद्र का
छोड़ अपना वजूद अपना अस्तित्व
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