Thursday, 18 January 2024

याद आए हैं

 गाँव आए हैं

देखने फिर से अपना गाँव आए हैं। 

सहेजने कुछ पुरानी याद आए हैं।। 


शहरों ने दी रोजी रोटी बहुत कुछ। 

लेने खाने में तृप्ति, स्वाद आए हैं।। 


थका दिया भागमभाग जिंदगी ने। 

गाँव में लेने सूकून की छांव आए हैं।। 


शहर की आपाधापी में उलझ गया था। 

जिंदगी में ना जाने कितने घाव खाए हैं।। 


बुड्ढा हो गया था वक्त से पहले नीलम। 

अपनों से चेहरे पर नए हावभाव आए हैं।। 

                







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