Wednesday, 8 May 2024

पत्थर की पीड़ा

 

साहिल के किनारे बैठ
हवा संग आती जाती
लहरों को ताकना
नहीं है मकसद मेरा
मैं पीड़ा जानना चाहती हूं
उन पत्थरों की भी जो  टूटते रहते हैं
छोटे-छोटे टुकड़ों में
बनते रहते हैं हिस्सा
अविरल बहते समुद्र का
अपनी पहचान गवा कर

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