चांद के आकार की तरह घटती बढ़ती इच्छाएं कभी पूर्णमासी के चांद सी परिपूर्ण कभी अमावस के चांद सी निल कभी ढेर सारी और कभी एक आध जिंदगी के साथ कदमताल करती हुई
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