Wednesday, 31 January 2024

सुकून

 खुद के लिए थोड़ा सा सूकून ढ़ूंढ़

जीने के लिए थोड़ा सा जूनून ढ़ूंढ़


इतना भी मुश्किल नही है खुश रहना 

बस अपने जैसे दोस्तों का हुजूम ढ़ूंढ़


निकल जा कभी अनछुई सी जगह पर

देवदार के घने पेड़ों के बीच सुरूर ढ़ूंढ़


वक़्त में खो जाता है प्यार अकसर ही 

खुद में जिंदा रखने के लिए वो नुपूर ढ़ूंढ़


जो चला गया उसे दुआ दे खुश रहने की

खुद को खुश रखने के लिए नया तुरूप ढ़ूंढ़


समंदर की लहरों में बैठ शांति से दो घड़ी

प्यार को याद कर क्षितिज का सुदूर ढ़ूंढ़


खोए हुए वक़्त की याद में ना बरबाद कर

खुद की खुशी के लिए नीलम हुज़ूर ढ़ूंढ़

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